झारखंड में इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न एक बदली हुई परंपरा के साथ मनाया जाएगा। 15 अगस्त 2025 को रांची के मोरहाबादी मैदान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तिरंगा नहीं फहराएंगे। इस दिन वह अपने पैतृक गांव नेमरा में रहेंगे, जहां वह अपने पिता और झारखंड के वरिष्ठ आदिवासी नेता शिबू सोरेन के श्राद्ध कर्म में शामिल होंगे। शिबू सोरेन का 4 अगस्त को दिल्ली के एक अस्पताल में 81 वर्ष की आयु में निधन हो गया था।
राज्यपाल करेंगे ध्वजारोहण
स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार, झारखंड के सीएम हर साल मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण करते हैं, जबकि राज्यपाल राज्य की उप-राजधानी दुमका में समारोह की अध्यक्षता करते हैं। इस साल यह परंपरा टूटेगी और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मोरहाबादी में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।
राज्य सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के अनुपस्थित रहने के चलते राज्यपाल को ध्वजारोहण का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है।
शिबू सोरेन का राजनीतिक सफर
‘दिशोम गुरु’ के नाम से मशहूर शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के सह-संस्थापक थे। उन्होंने राज्य के गठन और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई। वह तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और कई बार संसद के सदस्य भी रहे।
उनके निधन से राज्य की राजनीति और खासकर आदिवासी समाज में एक बड़ा खालीपन आ गया है।
‘At Home’ कार्यक्रम भी रद्द
राजभवन ने दिवंगत नेता के सम्मान में 15 अगस्त को आयोजित होने वाले पारंपरिक ‘At Home’ कार्यक्रम को भी रद्द करने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम में हर साल राज्यपाल राजभवन में गणमान्य व्यक्तियों की मेजबानी करते हैं।
मोरहाबादी समारोह का महत्व
रांची का मोरहाबादी मैदान झारखंड में स्वतंत्रता दिवस का मुख्य स्थल रहा है। यहां हर साल परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और राज्य सरकार की उपलब्धियों पर आधारित भाषण होते हैं। मुख्यमंत्री का ध्वजारोहण इस आयोजन की सबसे बड़ी परंपरा रही है। इस बार राज्यपाल की मौजूदगी में भी पूरा कार्यक्रम सम्मान और सुरक्षा के साथ आयोजित किया जाएगा।
जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया
जनता में इस बदलाव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग परंपरा टूटने पर निराश हैं, जबकि अधिकांश लोग मुख्यमंत्री के पारिवारिक कर्तव्यों को प्राथमिकता देने के फैसले को समझते हैं।
राजनीतिक दलों ने भी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए हेमंत सोरेन के निर्णय का समर्थन किया है। यहां तक कि विपक्षी नेताओं ने भी शिबू सोरेन को सम्मान देते हुए इस बदलाव को उचित बताया है।
अगले साल से परंपरा बहाल होने की उम्मीद
अधिकारियों का मानना है कि 2026 से मोरहाबादी मैदान में ध्वजारोहण की पुरानी परंपरा फिर से शुरू होगी। लेकिन 2025 का यह आयोजन झारखंड के इतिहास में एक खास और भावुक पन्ना जोड़ देगा, जहां स्वतंत्रता दिवस के साथ एक राजनीतिक और व्यक्तिगत विरासत को भी याद किया जाएगा।
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