केरल इन दिनों Naegleria fowleri यानी दिमाग खाने वाले अमीबा (Brain Eating Amoeba) के कारण दहशत में है। हाल के महीनों में इस संक्रमण के 67 से ज्यादा मामले सामने आए हैं, जिनमें अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है। नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल और राज्य स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। यह अमीबा नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है और मस्तिष्क के नाज़ुक ऊतकों को नष्ट कर देता है।
क्या है Brain Eating Amoeba?
यह संक्रमण Naegleria fowleri नामक सूक्ष्म जीव से होता है। यह इतना छोटा होता है कि आसानी से नाक के जरिए शरीर में प्रवेश कर सीधे दिमाग तक पहुंच जाता है। दिमाग के मुलायम टिशू इस संक्रमण से सबसे पहले प्रभावित होते हैं। अमीबा धीरे-धीरे इन्हें गलाना शुरू कर देता है। यही कारण है कि 98 प्रतिशत मामलों में मरीज की जान नहीं बच पाती।
संक्रमण के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते तापमान के कारण यह संक्रमण तेजी से फैल रहा है। गर्म और नम परिस्थितियां इस अमीबा के लिए उपयुक्त जगह होती हैं। यह प्रायः झील, तालाब, गर्म पानी के झरने, कम क्लोरीन वाले स्विमिंग पूल या पानी की टंकी में पाया जाता है।
तैराकी, डाइविंग या नहाने जैसी वॉटर एक्टिविटीज के दौरान इसके संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है। जब संक्रमित पानी नाक के जरिए शरीर में जाता है, तो यह अमीबा सीधा दिमाग तक पहुंच जाता है।
लक्षण
इस संक्रमण के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू से मिलते-जुलते होते हैं और संक्रमण के लगभग 9 दिन बाद प्रकट होते हैं।
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तेज बुखार और ठंड लगना
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सिरदर्द
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मतली और उल्टी
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गर्दन में अकड़न
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रोशनी से डर
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दौरे आना
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चक्कर और नींद में बदलाव
जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, मरीज में भ्रम, संतुलन खोना और बेहोशी जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
कैसे बढ़ता है संक्रमण
नाक से शरीर में प्रवेश करने के बाद यह अमीबा मस्तिष्क तक पहुंच जाता है। वहां यह इंफ्लेमेशन और ब्रेन टिशू को नुकसान पहुंचाता है। संक्रमण बेहद तेजी से फैलता है और मरीज 48 से 72 घंटे में गंभीर हालत में पहुंच जाता है।
केरल क्यों है ज्यादा प्रभावित
केरल में बढ़ता तापमान और पानी से जुड़ी सांस्कृतिक आदतें इस संक्रमण को और खतरनाक बना रही हैं। राज्य में झीलों और तालाबों में स्नान करना आम प्रथा है, जिससे जोखिम बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सावधानी बरतने और संदिग्ध लक्षणों पर तुरंत जांच करवाने की सलाह दी है।
जांच और इलाज
इस संक्रमण का समय पर पता लगाना मुश्किल है क्योंकि शुरुआती लक्षण सामान्य मेनिन्जाइटिस जैसे होते हैं। डॉक्टर MRI और सेरेब्रोस्पाइनल फ्लुइड टेस्ट से पुष्टि करते हैं।
इलाज में एंटी-अमीबिक और एंटी-फंगल दवाओं के साथ सपोर्टिव केयर दी जाती है। Amphotericin B और Miltefosine जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन सफलता दर बेहद कम है। दुनिया भर में सिर्फ कुछ ही मरीज पूरी तरह ठीक हो पाए हैं।
बचाव के उपाय
चूंकि इसका इलाज बहुत सीमित है, इसलिए रोकथाम ही सबसे बेहतर उपाय है।
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गर्म पानी वाली झीलों और तालाबों में तैराकी से बचें।
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स्विमिंग पूल को क्लोरीन से साफ रखें।
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पानी की गतिविधियों के दौरान नाक में पानी जाने से बचें या Nose Clip का इस्तेमाल करें।
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नाक की सफाई के लिए उबला या फ़िल्टर किया हुआ पानी ही इस्तेमाल करें।
जागरूकता क्यों है जरूरी
बहुत से लोग अब भी इस संक्रमण से अनजान हैं। जागरूकता से ही समय रहते जांच और इलाज संभव है। स्कूलों, सामुदायिक केंद्रों और स्थानीय प्रशासन को लोगों को सुरक्षित वॉटर प्रैक्टिस के बारे में शिक्षित करना चाहिए।
वैश्विक स्तर पर मामले
हालांकि यह संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन अमेरिका, पाकिस्तान और अन्य उष्णकटिबंधीय देशों में भी इसके मामले सामने आए हैं। केरल में एक ही समय में इतने अधिक मामले सामने आना चिंताजनक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ता तापमान इसके फैलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
ब्रेन ईटिंग अमीबा यानी Naegleria fowleri एक घातक संक्रमण है, जो केरल में चिंता का कारण बन गया है। यह नाक के जरिए शरीर में प्रवेश कर मस्तिष्क के ऊतकों को तेजी से नष्ट कर देता है। संक्रमण की पहचान मुश्किल है और इलाज के बावजूद सफलता की संभावना बेहद कम होती है।
ऐसे में रोकथाम ही सबसे अहम उपाय है। सुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग, स्विमिंग पूल की सफाई और जागरूकता ही इस बीमारी से बचाव का सबसे कारगर रास्ता है।
