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नेशनल अवार्ड जीतने के बाद सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं रानी मुखर्जी, बप्पा से लिया आशीर्वाद

बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी हाल ही में मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे में अपने दमदार अभिनय के लिए नेशनल अवार्ड से सम्मानित की गई हैं। इस खास उपलब्धि के बाद रविवार को रानी मुंबई स्थित प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचीं और गणपति बप्पा का आशीर्वाद लिया। एक्ट्रेस की यह तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें उन्हें श्रद्धा भाव से दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हुए देखा जा सकता है।

सादगी भरे अंदाज़ में दिखीं रानी

रानी मुखर्जी इस खास मौके पर सादगी और परंपरा में रची-बसी नजर आईं। उन्होंने हल्के नीले रंग का सूट पहना और लाल रंग की शॉल ओढ़ रखी थी। मंदिर में प्रवेश करते हुए रानी पूरी श्रद्धा के साथ भगवान गणेश के सामने खड़ी रहीं। उनके साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे, जो इस खास पल में उनका साथ देने पहुंचे थे। यह पूरा दृश्य मंदिर के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया गया, जो अब इंटरनेट पर छाया हुआ है।

फिल्म की थीम और रानी का अभिनय

रानी की फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे एक सच्ची घटना पर आधारित है। इस कहानी में एक भारतीय मां की पीड़ा को दिखाया गया है, जिसे उसके दोनों बच्चों से जबरन अलग कर दिया जाता है। नॉर्वे सरकार के खिलाफ एक लंबी और थकाऊ कानूनी लड़ाई में वह मां अपने बच्चों को वापस पाने के लिए संघर्ष करती है। इस रोल में रानी ने अपनी भावनात्मक गहराई और मजबूत अदाकारी से दर्शकों का दिल जीत लिया।

फिल्म की कहानी जितनी भावनात्मक थी, उतना ही प्रभावशाली था रानी का अभिनय। उनकी परफॉर्मेंस को दर्शकों और समीक्षकों से समान रूप से सराहना मिली। यह किरदार उनके करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक माना जा रहा है, जिसने उन्हें नेशनल अवार्ड दिलाया।

सिर्फ रानी नहीं, इन सितारों को भी मिला सम्मान

इस साल के नेशनल फिल्म अवार्ड्स में केवल रानी मुखर्जी ही नहीं, बल्कि अन्य सितारों को भी उनके बेहतरीन काम के लिए सम्मानित किया गया है। शाहरुख खान और विक्रांत मैसी को भी उनके अभिनय के लिए अवार्ड से नवाजा गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बॉलीवुड इस समय दमदार कहानियों और प्रतिभाशाली कलाकारों के संग एक नए युग में प्रवेश कर रहा है।

करियर की लंबी सफलता की कहानी

रानी मुखर्जी का फिल्मी करियर दो दशक से ज्यादा लंबा रहा है। राजा की आएगी बारात से लेकर मर्दानी और अब मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे तक, उन्होंने हर बार खुद को एक मजबूत और संजीदा अभिनेत्री के रूप में साबित किया है। उनके द्वारा निभाए गए किरदारों में गहराई, संवेदनशीलता और सामाजिक सन्देश हमेशा साफ दिखाई देता है।

उनका यह नया सम्मान यह दर्शाता है कि अच्छी स्क्रिप्ट और दमदार अभिनय आज भी दर्शकों को जोड़कर रखने की ताकत रखते हैं। नेशनल अवार्ड उनके अभिनय के प्रति समर्पण और मेहनत का परिणाम है।

फैंस और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

रानी मुखर्जी की सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस का उत्साह देखने लायक है। यूजर्स उन्हें बधाइयां दे रहे हैं और उनकी सादगी की तारीफ कर रहे हैं। साथ ही लोग फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे की भी सराहना कर रहे हैं, जो एक मां के संघर्ष की मार्मिक कहानी कहती है।

कई यूजर्स ने यह भी कहा कि रानी का ये कदम उन्हें और करीब लाता है क्योंकि ये साबित करता है कि इतनी बड़ी सफलता मिलने के बावजूद वे जमीन से जुड़ी हुई हैं और अपनी संस्कृति और आस्था को महत्व देती हैं।

सच्चाई और भावना से भरी कहानी का प्रभाव

यह फिल्म केवल एक मां की कानूनी लड़ाई की कहानी नहीं थी, बल्कि यह उस संघर्ष की प्रतीक भी बन गई है, जो प्रवासी भारतीय महिलाओं को कई बार झेलना पड़ता है। नॉर्वे की सामाजिक व्यवस्था, संस्कृति और भारतीय पारिवारिक मूल्यों के टकराव को बेहद संवेदनशीलता से दिखाया गया। रानी की इस फिल्म ने न केवल एक व्यक्तिगत कहानी को मंच पर लाया, बल्कि यह भी दिखाया कि सिनेमा किस तरह सामाजिक सरोकारों को उजागर कर सकता है।

भविष्य की उम्मीदें और नई राह

रानी मुखर्जी के इस सम्मान के बाद अब उनके अगले प्रोजेक्ट्स को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। फैंस को उम्मीद है कि आने वाले समय में वह और भी दमदार कहानियों के साथ नजर आएंगी। एक कलाकार के रूप में उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उम्र या दौर कोई मायने नहीं रखता, असली मायने रखता है अभिनय का असर।

उनकी सिद्धिविनायक यात्रा केवल एक धन्यवाद यात्रा नहीं थी, बल्कि यह उस विश्वास की भी झलक थी जो उन्होंने अपने काम और अपने भगवान में रखा है। इस क्षण को देखकर यह साफ होता है कि रानी सिर्फ एक स्टार नहीं हैं, बल्कि एक ऐसी कलाकार हैं जो हर मुकाम को विनम्रता के साथ स्वीकार करती हैं।

रानी मुखर्जी की सिद्धिविनायक यात्रा और नेशनल अवार्ड जीतना न केवल उनके करियर का सुनहरा पल है, बल्कि यह उस हर कलाकार की प्रेरणा भी बन गया है, जो ईमानदारी और मेहनत के बल पर आगे बढ़ना चाहता है। मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे की सफलता और रानी की परफॉर्मेंस यह बताती है कि सिनेमा का असली उद्देश्य लोगों के दिलों को छूना है — और रानी ने इस बार यह बखूबी कर दिखाया है।

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