प्रियंका चोपड़ा, जो आज एक ग्लोबल स्टार बन चुकी हैं, ना केवल बॉलीवुड की ‘देसी गर्ल’ हैं, बल्कि हॉलीवुड में भी अपनी अदाकारी का लोहा मंववा चुकी हैं। बॉलीवुड और हॉलीवुड दोनों ही इंडस्ट्रीज में खुद को स्थापित करने के बाद प्रियंका चोपड़ा ने अपने करियर के शुरुआती दौर में किए गए बलिदानों के बारे में खुलकर बात की।
प्रियंका ने हाल ही में अबू धाबी में हुए ब्रिज समिट में उन दिनों के बारे में बताया जब वह अपनी फिल्मी यात्रा की शुरुआत कर रही थीं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इंडस्ट्री में कदम रखा था, तब वह बिल्कुल भी सेलेक्टिव नहीं थीं। प्रियंका ने बताया कि वह जो भी काम उन्हें मिलता, उसे करने के लिए तैयार रहती थीं क्योंकि उन्हें लगता था कि काम मिलना मुश्किल है।
करियर के शुरुआत में हर चीज को हां कहती थीं प्रियंका
प्रियंका ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, “जब मैंने पहले काम करना शुरू किया था, मैं बिल्कुल भी सेलेक्टिव नहीं थी। जो भी मुझे मिलता, मैं करती। मैं ऐसा इसलिए करती थी क्योंकि मुझे लगता था कि काम मिलना कम है। मैं हर चीज को हां बोलती थी। जब मैं 20 साल की थी, तो मैं काफी लालची थी। मुझे हर दिन काम चाहिए था।”
प्रियंका ने अपनी इस बात से यह साफ किया कि वह अपने करियर की शुरुआत में बेहद उत्साही और मेहनती थीं, जो उन्हें हर अवसर को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था। उनकी यह मानसिकता उनके संघर्ष को दर्शाती है, जिसमें उन्होंने किसी भी काम को करने से इंकार नहीं किया था।
प्रियंका चोपड़ा ने किए कई बड़े बलिदान
प्रियंका ने आगे बताया कि उनके डेडिकेशन और वर्क एथिक की वजह से ही वह आज इस मुकाम पर हैं। वह कहती हैं, “मुझे ऐसा लगता है कि मैं अब अपने किए गए बलिदानों के दूसरे छोर पर हूं। मैंने काफी मेहनत की है। मैं अपने जन्मदिन को मिस कर देती थी, जब मेरे पिता अस्पताल में थे, तो मैं उनके पास नहीं थी। मैं क्रिसमस, दिवाली, परिवार के साथ वक्त बिताना सब कुछ मिस कर देती थी। उस वक्त मुझे बहुत काम करना पड़ता था। उन बलिदानों की वजह से ही मैं आज यहां हूं।”
प्रियंका के इस बयान से यह साफ है कि उन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में न केवल व्यक्तिगत खुशियों का बलिदान दिया, बल्कि परिवार और दोस्तों से समय भी गंवाया, ताकि वह अपने प्रोफेशन में सफल हो सकें।
अब खुद को चुनने का मौका मिला
प्रियंका चोपड़ा ने आगे कहा कि अब उन्हें यह मौका मिलता है कि वह खुद चुन सकें कि किस काम को करने के लिए हां बोलना है और किसे छोड़ना है। लेकिन प्रियंका ने यह भी कहा कि यह स्वतंत्रता उन्हें तभी मिल पाई है, जब उन्होंने पहले बहुत मेहनत की थी। “अब मैं चुन सकती हूं कि मुझे हां बोलना है या नहीं, लेकिन मैं यह तब नहीं कर पाती अगर उस समय मैंने इतनी मेहनत नहीं की होती। यही वजह है कि मैं अपने यंग वर्जन को धन्यवाद देती हूं,” प्रियंका ने कहा।
यह बयान प्रियंका के आज के करियर को दिखाता है, जहां वह अपनी मेहनत और संघर्ष के बाद अब सेलेक्टिव हो सकती हैं। आज, वह अपने प्रोजेक्ट्स को सही तरीके से चुन सकती हैं, क्योंकि वह जानती हैं कि सफलता पाने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा है।
प्रियंका चोपड़ा की सफलता के सफर में अगला कदम एक तेलुगू फिल्म है, जिसमें वह एस एस राजामौली के निर्देशन में काम करती हुई नजर आएंगी। इस फिल्म में उनके साथ महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिका में होंगे। यह फिल्म प्रियंका के करियर के लिए एक और महत्वपूर्ण मोड़ हो सकती है, क्योंकि वह अब दुनिया के बड़े फिल्म उद्योगों में काम कर रही हैं।
प्रियंका चोपड़ा का सफर यह साबित करता है कि सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत और बलिदान जरूरी है। उनकी कहानी उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। प्रियंका की मेहनत और समर्पण ने उन्हें ग्लोबल स्टार बना दिया, और आज वह एक सेलेक्टिव और सशक्त अभिनेत्री के रूप में जानी जाती हैं।
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