Home Entertainment कांतारा चैप्टर 1 रिव्यू: क्या सिनेमाघरों में देखने लायक है?

कांतारा चैप्टर 1 रिव्यू: क्या सिनेमाघरों में देखने लायक है?

साल 2022 में आई फिल्म कांतारा का प्रीक्वल, कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1, अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुका है। फिल्म के निर्देशक ऋषभ शेट्टी की इस फिल्म को लेकर दर्शकों में बहुत उम्मीदें हैं, खासकर क्योंकि कांतारा ने 70वें नेशनल फिल्म अवार्ड्स में ऋषभ शेट्टी को बेस्ट एक्टर और बेस्ट पॉपुलर फिल्म का अवॉर्ड दिलवाया था। ऐसे में कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1 से भी काफी उम्मीदें हैं। इस रिव्यू में हम आपको बताएंगे कि क्या यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरती है या नहीं।

कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1 की कहानी

कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1 हमें लगभग 1500 साल पहले की एक महाकाव्य गाथा से परिचित कराती है। फिल्म की कहानी कदंब वंश और एक आदिवासी योद्धा बर्मे के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे ऋषभ शेट्टी ने निभाया है। बर्मे अपने आदिवासी समुदाय, ज़मीन और परंपराओं की रक्षा के लिए बंगरा राज्य के राजा कुलशेखर से टकराता है। यह सिर्फ एक राजा और आदिवासी लोगों के बीच का संघर्ष नहीं है, बल्कि यह फिल्म प्रकृति बनाम सत्ता, विश्वास बनाम अहंकार और परंपरा बनाम लालच के टकराव की कहानी है।

कहानी के इस सशक्त संघर्ष में राजा और आदिवासी समुदाय के बीच एक गहरी लड़ाई की बुनियाद रखी गई है, जो दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। यह युद्ध केवल भूमि और अधिकार की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह जीवन के मूल्यों, विश्वासों और अस्तित्व के संघर्ष की एक अभूतपूर्व कहानी है।

अभिनय

ऋषभ शेट्टी ने बर्मे के किरदार में अद्भुत काम किया है। उनका अभिनय, खासकर ट्रांस और दैवीय शक्ति वाले सीन में, दर्शकों को रोमांचित कर देता है। रुक्मिणी वसंत ने कनकावती के किरदार में दिल छूने वाला अभिनय किया है। वह सिर्फ हीरो की प्रेमिका नहीं, बल्कि कहानी की अहम कड़ी हैं। उनकी भूमिका फिल्म में एक महत्वपूर्ण मोड़ लाती है। गुलशन देवैया ने राजा कुलशेखर के किरदार में अपने खलनायकी अंदाज से दर्शकों को प्रभावित किया है। उनके किरदार में एक खौफनाक प्रभुत्व है, जो फिल्म के ड्रामा को और भी तेज करता है।

सिनेमाघरों में देखने लायक है यह फिल्म?

इस फिल्म का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट इसके विज़ुअल्स हैं। जंगल, युद्ध, धार्मिक अनुष्ठान—यह सब कुछ इतना असली और शानदार है कि बड़े पर्दे पर देखना फिल्म को और भी मजेदार बना देता है। फिल्म का हर एक दृश्य दर्शकों को एक नई दुनिया में ले जाता है। अगर आप सिनेमा के शौकिन हैं, तो यह फिल्म आपको एक बेहतरीन अनुभव देने का वादा करती है।

फिल्म का सेट डिज़ाइन, युद्ध दृश्य और सांस्कृतिक अनुष्ठान बेहद प्रभावशाली हैं। इन सब तत्वों ने फिल्म को एक जीवंत अनुभव प्रदान किया है, जो सिनेमाघरों में देखना और भी बेहतर बनाता है।

संगीत और बैकग्राउंड स्कोर

बी. अजनीश लोकनाथ का संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाता है। हर ढोल, हर मंत्र आपको उस दौर में ले जाता है। फिल्म में लोक संगीत और पारंपरिक ध्वनियों का उपयोग पूरी तरह से कथा के साथ मेल खाता है। फिल्म की ध्वनियां और संगीत दृश्य की भावनाओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

हालांकि, एक छोटा सा कस्ट है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ के गाने के साथ उतना न्याय नहीं किया गया है जितना प्रमोशन में दिखाया गया था। फिल्म के अंदर उस गाने का उपयोग कम था, जबकि प्रमोशन के दौरान इसे ज्यादा महत्व दिया गया था।

फिल्म की ताकत

फिल्म का एक शानदार हिस्सा इसका क्लाइमेक्स है, जिसमें एक लंबा और रोमांचक 20 मिनट का सीक्वेंस है, जो सच में दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है। इस समय तक फिल्म दर्शकों को अपनी पकड़ में पूरी तरह से ले चुकी होती है, और यह सीन एक जबरदस्त इमोशन का वाहक बनता है।

इसके अलावा, फिल्म में कर्नाटका की पारंपरिक भूत कोला परंपरा को बेहद सटीक और बिना किसी छेड़छाड़ के दिखाया गया है। यह फिल्म को और भी खास बनाता है। यह पारंपरिक अनुष्ठान दर्शकों को एक वास्तविकता का अनुभव कराते हैं, जो बहुत कम फिल्मों में देखा जाता है।

कमजोरियां

फिल्म के पहले भाग में थोड़ा सा समय कहानी सेट करने में खर्च किया गया है, जिससे फिल्म थोड़ी स्लो लगती है। फिल्म की शुरुआत में कुछ ऐसे कॉमेडी सीन डाले गए हैं, जो फिल्म के गंभीर और प्रभावशाली वातावरण से मेल नहीं खाते। इन सीन की वजह से फिल्म का माहौल थोड़ी देर के लिए हल्का हो जाता है।

फिल्म में कुछ कन्नड़ डायलॉग्स थे, जो अगर दर्शकों को कन्नड़ भाषा नहीं आती तो समझने में मुश्किल हो सकती थी। नीचे सबटाइटल्स दिए गए थे, लेकिन उनकी साइज इतनी छोटी थी कि वे पूरी तरह से समझ में नहीं आ रहे थे। ऐसे में, कुछ महत्वपूर्ण संवादों का सही अनुभव लेने में मुश्किल हो सकती है।

क्या देखना चाहिए या नहीं?

कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1 एक ऐसी फिल्म है जिसमें शानदार विजुअल्स, पारंपरिक लोक संस्कृति की बेहतरीन प्रस्तुति और ऋषभ शेट्टी की दमदार परफॉर्मेंस है। फिल्म की कहानी थोड़ी स्लो है, लेकिन जैसे ही फिल्म अपनी गति पकड़ती है, वह दर्शकों को बांधकर रखती है। फिल्म में कुछ छोटी-छोटी कमजोरियां हैं, लेकिन इसके उत्कृष्ट दृश्य, म्यूजिक और दमदार अभिनय की वजह से यह देखने लायक है।

अगर आप एक ऐसे दर्शक हैं, जो ऐतिहासिक और लोक आधारित फिल्मों का आनंद लेते हैं, तो यह फिल्म आपको जरूर पसंद आएगी। कांतारा के इस नए अध्याय में आपको भावनाओं, ऐक्शन और संस्कृति का शानदार मिश्रण मिलेगा।

कांतारा: ए लीजेंड चैप्टर 1 एक बेहतरीन फिल्म है जो ऋषभ शेट्टी के निर्देशन में बनी है। इसकी शानदार परफॉर्मेंस, सशक्त कहानी, और शानदार विजुअल्स इसे एक देखने लायक फिल्म बनाते हैं। पहले भाग में धीमी गति को लेकर थोड़ी चिंता हो सकती है, लेकिन फिल्म का क्लाइमेक्स और उसके बाद का भाग निश्चित रूप से इसके हर पहलू को संतुलित करता है। यह फिल्म एक अच्छा सिनेमाई अनुभव प्रदान करती है, और अगर आप एक ऐतिहासिक ड्रामा प्रेमी हैं, तो यह आपके लिए एक बेहतरीन फिल्म साबित हो सकती है।

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