KKN गुरुग्राम डेस्क | टेलीविजन का मशहूर क्राइम शो CID अब अपने नए अवतार CID 2 के साथ दर्शकों के सामने है। लेकिन जिस उम्मीद और जोश के साथ इस सीक्वल की शुरुआत हुई थी, वह अब फैंस की नाराजगी और असमंजस में बदलता जा रहा है।
CID 2 इन दिनों कलाकारों के लगातार आने-जाने की वजह से चर्चा में है। हर हफ्ते नए चेहरे नजर आते हैं और कुछ एपिसोड के बाद अचानक शो से गायब हो जाते हैं। इस ट्रेंड से फैंस परेशान हो चुके हैं और सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहे हैं।
TRP के लिए हो रहा है ‘एंट्री-एग्जिट’ का खेल?
टीवी इंडस्ट्री में TRP (टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट्स) एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है, लेकिन CID 2 के मेकर्स पर यह आरोप लग रहा है कि वे TRP बढ़ाने के लिए जानबूझकर कलाकारों की अदला-बदली कर रहे हैं।
फैंस का मानना है कि यह रणनीति सिर्फ और सिर्फ टीआरपी के नंबरों के लिए अपनाई जा रही है, और इसका सीधा असर शो की कहानी, भावनात्मक जुड़ाव और विश्वसनीयता पर पड़ रहा है।
एक दर्शक ने ट्वीट किया:
“हर एपिसोड में नया चेहरा और फिर उसका गायब हो जाना, ये सीआईडी नहीं कोई एक्सपेरिमेंटल शो लग रहा है।”
शो की आत्मा गायब, बस रह गया दिखावा?
CID, जो सालों तक भारतीय टेलीविजन का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय क्राइम शो रहा, उसकी आत्मा उसके स्थायी और मजबूत किरदारों में थी। एसीपी प्रद्युम्न, दया, अभिजीत जैसे पात्रों से दर्शक जुड़ाव महसूस करते थे।
लेकिन CID 2 में लगातार बदलती कास्ट ने उस जुड़ाव को कमजोर कर दिया है। दर्शक कहते हैं कि कहानी में कोई स्थिरता नहीं है, हर केस में नए चेहरे, नए अफसर और पुरानों की कोई खबर नहीं—इससे भावनात्मक संबंध टूटता जा रहा है।
फैंस की नाराजगी सोशल मीडिया पर साफ झलकती है
सोशल मीडिया पर हैशटैग #CID2TRPGame, #BringBackOriginalCID, और #StopReplacingActors ट्रेंड कर चुके हैं।
फैंस का कहना है कि:
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शो में कोई स्थिरता नहीं है।
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नए पात्रों को दर्शकों से जुड़ने का मौका नहीं दिया जाता।
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पहले से मौजूद किरदारों को बिना किसी वजह के हटा दिया जाता है।
एक इंस्टाग्राम यूजर ने लिखा:
“हमने CID इसलिए पसंद किया था क्योंकि वो हमें परिवार जैसा लगता था। अब हर हफ्ते नया ऑफिसर देखकर लगता है जैसे किसी और शो में आ गए हों।”
क्या मेकर्स कर रहे हैं प्रयोग या कर रहे हैं गलती?
टीवी एक्सपर्ट्स का मानना है कि CID 2 के मेकर्स रियल टाइम व्यूअर डेटा के आधार पर कास्टिंग में बदलाव कर रहे हैं। यानी अगर कोई किरदार फैंस को पसंद नहीं आता, तो उसे हटा दिया जाता है और नया चेहरा लाया जाता है।
लेकिन यह अत्यधिक प्रयोगवाद अब शो को नुकसान पहुंचा रहा है। बार-बार बदलाव से ना केवल नैरेटिव कमजोर होता है, बल्कि दर्शकों का भरोसा भी टूटता है।
मूल शो की सफलता की असली वजह क्या थी?
मूल CID शो की सफलता का सबसे बड़ा कारण था उसका मजबूत और स्थायी किरदारों का समूह, जिनका आपसी तालमेल और टीम भावना ने दर्शकों को सालों तक जोड़े रखा।
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केस भले ही नए होते थे, लेकिन टीम वही रहती थी।
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दर्शक पात्रों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ जाते थे।
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हर किरदार का विकास (character arc) होता था।
CID 2 इन सभी बिंदुओं में कमजोर साबित हो रहा है। दर्शक ना तो किरदारों को पहचान पा रहे हैं, ना ही उनसे जुड़ पा रहे हैं।
क्या मेकर्स को लेनी चाहिए फैंस की बातों को गंभीरता से?
फिलहाल शो के निर्माताओं की तरफ से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन अगर दर्शकों की निराशा यूं ही बढ़ती रही, तो शो की TRP भी गिर सकती है, और CID 2 को लंबे समय तक चलाना मुश्किल हो जाएगा।
दर्शकों और विशेषज्ञों की राय में मेकर्स को चाहिए कि:
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मुख्य कास्ट को स्थिर रखें।
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पात्रों के बैकस्टोरी और विकास पर ध्यान दें।
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TRP के लिए गिमिक और शॉर्टकट से बचें।
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मूल CID की भावना को बनाए रखें।
अब भी है मौका: सुधार करें तो चमक सकता है शो
बावजूद इसके कि CID 2 को लेकर काफी आलोचना हो रही है, शो में संभावनाएं अब भी मौजूद हैं। इसका कॉन्सेप्ट आज भी दर्शकों को पसंद आता है। क्राइम, थ्रिलर और इन्वेस्टिगेशन जैसे तत्व आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं।
अगर मेकर्स थोड़ी गंभीरता दिखाएं और फैंस की बातों को सुनें, तो CID 2 एक बार फिर से दर्शकों के दिलों में जगह बना सकता है।
CID 2 एक प्रतिष्ठित शो की विरासत लेकर आया है। लेकिन बार-बार कलाकारों के बदलाव और TRP के पीछे की भागदौड़ ने शो की मूल भावना को कमजोर कर दिया है।
यदि मेकर्स चाहते हैं कि CID 2 भी उसी सफलता को दोहराए जो मूल शो को मिली थी, तो उन्हें दर्शकों के साथ विश्वास और स्थिरता की भावना फिर से पैदा करनी होगी।
KKNLive.com आपको CID 2 से जुड़ी हर नई जानकारी, अपडेट और दर्शकों की राय आगे भी सबसे पहले देगा।
