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UPSC सफलता की कहानी: अमैठी गांव की Shweta Kumari बनीं राजभाषा विभाग में Junior Translation Officer

बिहार के गया जिले के वजीरगंज प्रखंड के अमैठी गांव में उस समय खुशी की लहर दौड़ गई जब UPSC परीक्षा पास कर चयनित Shweta Kumari पहली बार अपने गांव लौटीं। ग्रामीणों ने कुशवाहा भवन परिसर में उनका जोरदार स्वागत किया। फूल, तालियां और शुभकामनाओं के बीच Shweta ने अपने गांव के लोगों से मुलाकात की और आशीर्वाद लिया।

Shweta ने UPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर गृह मंत्रालय के अधीन राजभाषा विभाग में Junior Translation Officer का पद प्राप्त किया है। उनकी उपलब्धि ने न सिर्फ़ उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव का मान बढ़ा दिया।

समारोह में प्रेरक संदेश

स्वागत समारोह की अध्यक्षता पूर्व मुखिया पुनीत महतो ने की, जबकि संचालन शिक्षाविद राजेंद्र प्रसाद ने संभाला। इस मौके पर पंचायत समिति सदस्य शशिभूषण प्रसाद और सम्राट अशोक कुशवाहा सेवा समिति के पूर्व अध्यक्ष पिंकू वर्मा ने शिक्षा की महत्ता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा वह हथियार है जिससे हर मंजिल पाई जा सकती है। चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, बच्चों की पढ़ाई किसी भी हाल में नहीं रुकनी चाहिए।

Shweta ने भी अपने संबोधन में ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, बच्चों को स्कूल जरूर भेजें। “आधी रोटी खाकर भी बच्चों को पढ़ाएं, ताकि उनका भविष्य रोशन हो,” उन्होंने कहा।

कौन हैं Shweta Kumari?

Shweta Kumari, अमैठी गांव के निवासी सुशील मालाकार और सुनीता भगत की बेटी हैं। उनके पिता एक किसान और समाज के सक्रिय सदस्य हैं, जबकि मां गृहिणी हैं।

Shweta ने UPSC परीक्षा पास कर Rajbhasha Department में Junior Translation Officer का पद हासिल किया। यह पद उन्हें गृह मंत्रालय के अधीन मध्य प्रदेश के इंदौर में मिला है।

शिक्षा से UPSC तक का सफर

Shweta ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई अमैठी के प्राथमिक विद्यालय में की और 10 साल की उम्र तक वहीं पढ़ीं। इसके बाद वे अपने पिता के साथ कोलकाता चली गईं, जहां उन्होंने मैट्रिक और आगे की पढ़ाई पूरी की।

उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं और 2023 में पहली बार UPSC परीक्षा में शामिल हुईं। मेहनत और अनुशासन के बल पर उन्होंने प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू—तीनों चरणों में सफलता पाई।

परिवार का गर्व और समर्थन

Shweta के पिता सुशील मालाकार ने कहा कि उन्होंने बेटी की पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास किया। UPSC में सफलता ने पूरे परिवार और गांव का नाम रोशन किया।

उनके दादा राजकुमार मालाकार अपनी पोती की सफलता से भावुक हो गए और खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

ग्रामीणों के लिए संदेश

गांव लौटने पर Shweta ने सभी का आभार जताया और बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि उनकी यह उपलब्धि गांव के बच्चों को उच्च शिक्षा की ओर प्रेरित करेगी।

उनका संदेश साफ था—बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने के लिए प्रेरित करें।

शिक्षा से विकास का रास्ता

Shweta की सफलता यह साबित करती है कि सही दिशा, मेहनत और शिक्षा से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। एक छोटे से गांव की साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सफलता पाई।

गांव के लोग मानते हैं कि Shweta का यह सफर आने वाले समय में और युवाओं को UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रेरित करेगा।

Shweta Kumari की कहानी यह बताती है कि शिक्षा, अनुशासन और धैर्य के साथ किसी भी मंजिल को पाया जा सकता है। अमैठी गांव से UPSC तक का उनका सफर सिर्फ़ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरे गांव और जिले के लिए गर्व का विषय है।

उनकी उपलब्धि ने यह संदेश दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए, तो कोई सपना अधूरा नहीं रह सकता।

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