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UPSC Mains 2025 GS Paper 1 : इतिहास, भूगोल और समाज से जुड़े गहरे सवालों ने परखी विश्लेषण क्षमता

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने UPSC CSE Mains Exam 2025 की शुरुआत कर दी है। पहले ही दिन UPSC Mains 2025 GS Paper 1 में पूछे गए सवालों ने अभ्यर्थियों की समझ और विश्लेषण क्षमता को कड़ी चुनौती दी।

इस पेपर में इतिहास, भूगोल, समाज और मौजूदा वैश्विक मुद्दों पर आधारित प्रश्न शामिल थे। आयोग का मकसद साफ था – केवल तथ्यों का ज्ञान नहीं, बल्कि उम्मीदवार की गहराई से सोचने और जोड़ने की क्षमता का आकलन करना।

इतिहास से जुड़े सवाल

इतिहास खंड में पूछे गए सवालों ने उम्मीदवारों से गहन और विश्लेषणात्मक उत्तर की मांग की। इसमें हड़प्पा सभ्यता की वास्तुकला, अकबर की धार्मिक समन्वय नीति, चंदेल कला में शिल्पकारों की भूमिका और ज्योतिबा फुले के सामाजिक सुधार प्रयास जैसे टॉपिक्स शामिल थे।

यहां UPSC ने यह सुनिश्चित किया कि उम्मीदवार केवल तिथियों और घटनाओं तक सीमित न रहें, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक संदर्भ में भी उनका विश्लेषण कर सकें।

भूगोल और पर्यावरण पर फोकस

भूगोल खंड ने पारंपरिक कॉन्सेप्ट्स के साथ समकालीन संकटों को भी जोड़ा। अभ्यर्थियों से जलवायु परिवर्तन और समुद्र स्तर बढ़ने से द्वीपीय देशों पर असर, ऑफशोर तेल भंडार, टेक्टोनिक मूवमेंट्स और गंगा बेसिन की जनसंख्या घनत्व जैसे मुद्दों पर सवाल किए गए।

यहां आयोग ने उम्मीदवारों से अपेक्षा की कि वे physical geography को वर्तमान पर्यावरणीय संकटों से जोड़ें। इससे यह साफ हुआ कि UPSC ऐसे प्रशासक चाहता है जो सिद्धांत और वास्तविक चुनौतियों दोनों को समझ सकें।

समाज और समकालीन चुनौतियां

समाज खंड में प्रश्नों ने अभ्यर्थियों की संवेदनशीलता और समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण को परखने का काम किया। इसमें Smart Cities, वैश्वीकरण और उपभोक्तावाद, फास्ट फूड इंडस्ट्री का प्रभाव, शहरी गरीबी, जन न्याय, जनजातीय विस्थापन और पुनर्वास जैसे विषय शामिल थे।

यहां से यह स्पष्ट हो गया कि आयोग ऐसे उम्मीदवारों को आगे देखना चाहता है जिनके पास societal sensitivity और balanced analysis हो।

अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया

प्रारंभिक प्रतिक्रियाओं में कई उम्मीदवारों ने कहा कि पेपर संतुलित लेकिन चुनौतीपूर्ण था। इतिहास का हिस्सा अपेक्षाकृत सहज लगा, लेकिन भूगोल खंड में जलवायु परिवर्तन जैसे समकालीन मुद्दों ने कठिनाई बढ़ाई।

समाज से जुड़े प्रश्न सबसे चुनौतीपूर्ण रहे क्योंकि उनमें तथ्यों के साथ संवेदनशील विश्लेषण भी जरूरी था।

क्यों खास रहा GS Paper 1

UPSC Mains 2025 GS Paper 1 ने एक बार फिर साबित किया कि यह परीक्षा केवल याददाश्त पर आधारित नहीं है। आयोग ने इतिहास, भूगोल और समाज को आपस में जोड़ते हुए उम्मीदवारों से multi-dimensional analysis की मांग की।

यह पेपर उन उम्मीदवारों के लिए लाभदायक रहा जिन्होंने UPSC History Questions और UPSC Geography Questions को समकालीन परिप्रेक्ष्य से जोड़ा और समाज से संबंधित मुद्दों को गहराई से समझा।

तैयारी के लिए सबक

इस पेपर से भविष्य के अभ्यर्थियों को यह सबक मिलता है कि:

  • केवल रटकर पढ़ाई पर्याप्त नहीं, analytical depth जरूरी है।

  • भौतिक भूगोल को climate change और current affairs से जोड़ना होगा।

  • समाजशास्त्र और contemporary issues पर संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

  • उत्तर लेखन (answer writing) में तथ्य, उदाहरण और संतुलित तर्क अनिवार्य हैं।

UPSC Mains 2025 GS Paper 1 ने अभ्यर्थियों को इतिहास, भूगोल और समाज से जुड़े गहरे सवालों से परखा। पेपर में हड़प्पा सभ्यता से लेकर अकबर की नीतियों तक, जलवायु परिवर्तन से लेकर Smart Cities तक और उपभोक्तावाद से लेकर जनजातीय विस्थापन तक, विविध विषय शामिल रहे।

यह पेपर यह याद दिलाता है कि UPSC CSE Mains Exam केवल ज्ञान की परीक्षा नहीं, बल्कि दृष्टिकोण, संवेदनशीलता और विश्लेषण क्षमता की भी परीक्षा है।

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