सोना भारतीय बाजार में हमेशा से सुरक्षित निवेश का प्रतीक रहा है। यह न केवल परंपराओं और संस्कृति का हिस्सा है, बल्कि आर्थिक अनिश्चितताओं में एक मजबूत सहारा भी है। पिछले कुछ वर्षों में इसके दामों में जो उछाल आया है, उसने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों का ध्यान खींचा है।
कुछ साल पहले तक 10 ग्राम सोना करीब ₹30,000 में मिल जाता था। लेकिन जुलाई 2025 तक इसका भाव ₹1 लाख के करीब पहुंच गया। यानी सिर्फ छह साल में 200% की बढ़ोतरी। अब बड़ा सवाल है—क्या आने वाले वर्षों में इसका दाम ₹2.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है?
लगातार बढ़ते सोने के दाम
कुछ समय पहले तक 10 ग्राम सोने का रेट ₹50,000 से नीचे था। आज 24 कैरट गोल्ड का दाम दिल्ली में ₹1,02,640 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच चुका है। 22 कैरट गोल्ड भी इसी के करीब बिक रहा है।
देश के लगभग सभी बड़े शहरों में कीमतें करीब-करीब यही हैं। पहले जहां 10 ग्राम सोना ₹30,000 में मिल जाता था, वहीं अब जुलाई 2025 तक इसने ₹1 लाख का आंकड़ा पार कर लिया है। पिछले छह साल में 200% की इस छलांग ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आगे इसका भविष्य क्या होगा।
सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?
सोने की कीमत में इतनी तेजी के पीछे कई ग्लोबल फैक्टर्स जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ा कारण है अंतरराष्ट्रीय तनाव। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग, ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष, और कोविड-19 महामारी के बाद की आर्थिक अनिश्चितताएं—ये सभी सोने की डिमांड को बढ़ा रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब दुनिया में राजनीतिक और आर्थिक संकट गहराते हैं, तब निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाशते हैं, और सोना हमेशा से सबसे भरोसेमंद ‘Safe Haven’ रहा है।
निवेशकों की पहली पसंद—Gold
अप्रैल 2025 में MCX पर 10 ग्राम सोने का भाव ₹1,01,078 तक पहुंच गया था। Live Mint की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो अगले पांच साल में 10 ग्राम सोना ₹2,25,000 तक जा सकता है।
2019 से 2025 के बीच सोने के दाम सालाना औसतन 18% की दर से बढ़े हैं। इस रफ्तार से देखें तो ₹2.5 लाख प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा दूर नहीं है।
ग्लोबल इकोनॉमी और गोल्ड का रिश्ता
सोने का प्रदर्शन ग्लोबल मार्केट की स्थिति पर काफी निर्भर करता है। जब महंगाई बढ़ती है, करेंसी कमजोर होती है या शेयर बाजार में अस्थिरता आती है, तो सोने में निवेश तेजी से बढ़ता है।
हालांकि, हालिया रिपोर्ट बताती है कि केंद्रीय बैंक अब सोना खरीदने की गति धीमी कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, चीन ने अपने बीमा क्षेत्र की कुल परिसंपत्ति का सिर्फ 1% सोने में लगाया है। यह मांग के ट्रेंड को बदल सकता है।
क्या बाजार में स्थिरता आएगी?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सोना जल्द ही ‘कंसोलिडेशन फेज़’ में जा सकता है। यानी कीमतें लंबे समय तक एक रेंज में रह सकती हैं, जब तक कि कोई बड़ा ग्लोबल इवेंट कीमतों को फिर से ऊपर न धकेले।
सोने के दाम बढ़ाने वाले कारक
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बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या युद्ध
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महंगाई दर में तेज उछाल
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ग्लोबल इकोनॉमी में मंदी
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केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद बढ़ाना
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अमेरिकी डॉलर जैसी बड़ी करेंसी का कमजोर होना
सोने के दाम घटाने वाले कारक
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अंतरराष्ट्रीय तनाव में कमी
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शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था का सुधार
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निवेशकों की डिमांड में गिरावट
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गोल्ड माइनिंग प्रोडक्शन का बढ़ना
निवेशकों के लिए सलाह
लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए सोना अभी भी एक जरूरी एसेट है। लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि पीक प्राइस पर बड़ी खरीद से बचना चाहिए। छोटे निवेशक फिजिकल गोल्ड की बजाय गोल्ड ETF या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड चुन सकते हैं।
क्या ₹2.5 लाख तक पहुंचेगा सोना?
अगर 2019-2025 जैसी ग्रोथ रेट जारी रही, तो अगले दशक में ₹2.5 लाख का आंकड़ा संभव है। लेकिन अगर ग्लोबल माहौल स्थिर रहा, तो यह लक्ष्य देर से पूरा हो सकता है।
₹30,000 से ₹1 लाख तक पहुंचने की सोने की यात्रा सिर्फ छह साल में पूरी हुई है। यह न सिर्फ निवेश के लिहाज से बल्कि आर्थिक सुरक्षा के नजरिए से भी इसकी अहमियत साबित करता है।
आने वाले समय में इसका भविष्य ग्लोबल इवेंट्स, आर्थिक स्थिरता और निवेशकों की डिमांड पर निर्भर करेगा। फिलहाल, सोना अब भी ‘Safe Haven’ बना हुआ है, और इसकी चमक जल्द कम होती नहीं दिख रही।
