भारतीय अंतरिक्ष यात्री Shubhanshu Shukla ने रविवार को भारतीय वायुसेना के एक कार्यक्रम में अपनी जीवन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि बचपन में वह बेहद शर्मीले और संकोची थे। युवावस्था में उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन अंतरिक्ष यात्रा करेंगे।
Shubhanshu Shukla ने कहा कि बचपन में उन्होंने कभी Astronaut बनने का सपना नहीं देखा। वह शांत और झिझकने वाले स्वभाव के थे। युवावस्था तक उनके मन में अंतरिक्ष जाने की कल्पना भी नहीं थी।
उन्होंने बताया कि उन्होंने भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री Rakesh Sharma की ऐतिहासिक उड़ान की कहानियां ज़रूर सुनी थीं। लेकिन उस समय तक उन्होंने खुद को अंतरिक्ष यात्रा से कभी नहीं जोड़ा था।
हाल ही में Shubhanshu Shukla Axiom 4 Mission का हिस्सा बने। इस मिशन ने उन्हें International Space Station (ISS) तक पहुंचाया। वह इस मिशन के जरिए ISS जाने वाले पहले भारतीय बने।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा अविस्मरणीय थी। मिशन के लिए लंबे समय तक कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन की ज़रूरत थी। स्पेस में काम करना पूरी तरह से टीमवर्क और सटीकता पर आधारित होता है।
कार्यक्रम में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने Shubhanshu Shukla और अन्य तीन गगनयात्रियों को सम्मानित किया। यह समारोह दिल्ली के सुब्रतो पार्क में आयोजित किया गया था।
राजनाथ सिंह ने कहा कि गगनयान मिशन आत्मनिर्भर भारत की यात्रा में नया अध्याय साबित होगा। उन्होंने इन चारों Astronauts को देश का रत्न बताया और उनकी मेहनत को सलाम किया।
गगनयान परियोजना को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 2018 में औपचारिक रूप से लॉन्च किया था। इसका लक्ष्य है कि 2027 में तीन सदस्यीय दल को 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर तीन दिवसीय मिशन पर भेजा जाए।
फरवरी 2024 में Thiruvananthapuram स्थित Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC) में इन गगनयात्रियों के नामों की घोषणा हुई थी। उस समय प्रधानमंत्री मोदी खुद मौजूद थे।
गगनयान मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया गया है। इनमें Group Captain Prashanth Balakrishnan Nair, Group Captain Ajit Krishnan, Group Captain Angad Pratap और Wing Commander Shubhanshu Shukla शामिल हैं।
ये चारों भारतीय वायुसेना के अधिकारी हैं और कठोर प्रशिक्षण के बाद इस मिशन के लिए चुने गए हैं।
गगनयान मिशन केवल तकनीकी परियोजना नहीं है, बल्कि यह भारत की महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। ISRO पहले ही चंद्रयान और मंगलयान जैसी सफलताओं से दुनिया को प्रभावित कर चुका है। अब Human Spaceflight प्रोग्राम भारत को उस चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगा जो अपने Astronauts को खुद अंतरिक्ष में भेज सकते हैं।
Shubhanshu Shukla का Axiom 4 Mission में योगदान यह साबित करता है कि भारत इस दिशा में पूरी तरह तैयार है।
Shukla ने कहा कि उनकी कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सपने देखने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने साबित किया कि मेहनत और समर्पण से किसी भी मुकाम तक पहुंचा जा सकता है।
एक शर्मीले बच्चे से लेकर Indian Astronaut बनने तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि सही अवसर और दृढ़ संकल्प इंसान की ज़िंदगी बदल सकते हैं।
Shubhanshu Shukla का बचपन अंतरिक्ष के सपनों से भरा नहीं था, लेकिन आज उनका नाम भारत के पहले Astronauts में लिया जा रहा है जिन्होंने Axiom 4 Mission के जरिए ISS तक यात्रा की।
रक्षा मंत्री द्वारा सम्मानित किए गए चार गगनयात्रियों में उनका नाम गगनयान मिशन के लिए भी दर्ज है। 2027 का यह मिशन भारत की Space Journey में ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा।
Shubhanshu Shukla की कहानी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। यह दिखाती है कि आत्मविश्वास और समर्पण से सपनों की उड़ान कभी भी शुरू की जा सकती है।
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