भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 28 सितंबर 2025, रविवार को मुजफ्फरपुर स्थित कटरा चामुंडा देवी मंदिर में पूजा करेंगे। यह उनका उपराष्ट्रपति बनने के बाद पहला दौरा होगा, और इस यात्रा को लेकर पिछले कुछ दिनों से तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। उपराष्ट्रपति के इस दौरे को लेकर मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया है।
कटरा चामुंडा देवी मंदिर: एक प्रमुख शक्तिपीठ
कटरा स्थित चामुंडा धाम, भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। मंदिर के सचिव सुरेश कुमार साह ने बताया कि यह स्थान धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने आते हैं। मंदिर में हर साल हजारों भक्त अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए पहुंचते हैं। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां तंत्र-मंत्र की साधना भी की जाती है, और यह स्थान देवी चामुंडा के प्रमुख पवित्र स्थानों में शामिल है।
उपराष्ट्रपति का यह दौरा और उनका पुराना संबंध
सीपी राधाकृष्णन का कटरा चामुंडा स्थान से एक पुराना संबंध है। उन्होंने 10 जून 2010 को पहली बार इस मंदिर का दौरा किया था, जब वे भाजपा के नेता थे। उस समय वे एक स्थानीय व्यक्ति से मिले थे, जो उन्हें मंदिर घुमाने लेकर गए थे। राधाकृष्णन ने उस समय मंदिर में पूजा अर्चना की और मन्नत मांगी थी। इसके बाद वे झारखंड और महाराष्ट्र के राज्यपाल बने। हालांकि राज्यपाल बनने के बाद भी उनकी इस मंदिर में आने की योजना थी, लेकिन किसी कारणवश वे यहां नहीं आ सके थे। अब उपराष्ट्रपति बनने के बाद वे इस मंदिर में अपनी श्रद्धा अर्पित करने के लिए आ रहे हैं।
मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
चामुंडा देवी मंदिर का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। यह मंदिर शक्ति पीठों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे लेकर मान्यता है कि जब देवी सती ने आत्मदाह किया था, तब उनके शरीर के अंग यहां गिरे थे। खासतौर पर यहां देवी के स्कंद के गिरने की मान्यता है, और इस कारण इस स्थान को “असली चामुंडा माता” के रूप में पूजा जाता है।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर भी इस मंदिर में दर्शन कर चुके हैं और उन्होंने भी मां चामुंडा का आशीर्वाद लिया था। इस मंदिर की तंत्र साधना के लिए भी विशेष प्रसिद्धि है। यह स्थल हर वर्ष भक्तों से भरा रहता है, और यहां के धार्मिक माहौल में श्रद्धालु अपनी आत्मा की शांति के लिए आते हैं।
उपराष्ट्रपति का यात्रा कार्यक्रम
सीपी राधाकृष्णन रविवार, 28 सितंबर 2025 को दोपहर में मुजफ्फरपुर के कटरा पहुंचेंगे। मंदिर के पास तीन किलोमीटर दूर धनौर में हेलीपैड बनाए गए हैं, जहां से उपराष्ट्रपति हेलीकॉप्टर द्वारा मंदिर जाएंगे। एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से उनका आगमन सुनिश्चित किया गया है। इसके बाद वे सीधे मंदिर जाएंगे और पूजा करेंगे।
स्थानीय अधिकारियों ने इस यात्रा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी सभी सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। उपराष्ट्रपति के दौरे को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं, ताकि यात्रा के दौरान कोई समस्या न हो।
इस यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव
यह यात्रा न केवल एक राजनीतिक महत्व रखती है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उपराष्ट्रपति का इस मंदिर में आना इस स्थान के धार्मिक महत्त्व को और बढ़ाएगा। यह यात्रा ना सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए बल्कि देशभर के भक्तों के लिए गर्व की बात होगी। उपराष्ट्रपति का मंदिर में आना एक सम्मान का प्रतीक है और इससे इस मंदिर की प्रतिष्ठा में और वृद्धि होगी।
भारत के राजनेताओं द्वारा धार्मिक स्थलों पर दौरे, खासकर शक्तिपीठों पर, यह दर्शाता है कि हमारी संस्कृति और धर्म हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। यह यात्रा न केवल देश की धार्मिक परंपराओं को सम्मानित करती है, बल्कि स्थानीय संस्कृति को भी प्रोत्साहन देती है।
मंदिर और पर्यटन का भविष्य
उपराष्ट्रपति की यह यात्रा चामुंडा स्थान के लिए और भी अधिक पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित कर सकती है। यह मंदिर पहले से ही एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, और उपराष्ट्रपति के आगमन से इसकी प्रतिष्ठा और भी बढ़ेगी। धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से यह स्थान महत्वपूर्ण है, और इस प्रकार की यात्राएं मंदिर के प्रचार-प्रसार के लिए सहायक होती हैं।
अलवां, धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रूप में भी विकसित करने के लिए भारतीय सरकार कई योजनाएं बना रही है, और चामुंडा देवी मंदिर जैसे स्थल इस योजना के तहत आने वाले प्रमुख स्थानों में शामिल हो सकते हैं।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का कटरा चामुंडा देवी मंदिर का दौरा एक ऐतिहासिक और धार्मिक क्षण होगा। यह यात्रा मंदिर के भक्तों और स्थानीय समुदाय के लिए गर्व की बात होगी। उपराष्ट्रपति के आने से न केवल इस मंदिर की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, बल्कि भारत की धार्मिक विविधता और संस्कृति की महत्ता को भी बढ़ावा मिलेगा। मंदिर में पूजा करने के बाद वे इस पवित्र स्थल के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करेंगे, जो आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए और भी अधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।
इस यात्रा से यह भी स्पष्ट होता है कि धार्मिक स्थलों और भारतीय संस्कृति के प्रति भारत सरकार और उसके नेता सशक्त प्रतिबद्ध हैं, जो भविष्य में और अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित करने में मदद करेगा।
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