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पटना में दूध पीने से तीन बच्चों की मौत, राखी के मौके पर मचा मातम

पटना जिले के पालीगंज के कलेर प्रखंड के मसदपुर गांव में एक दर्दनाक हादसा हुआ है। एक ही परिवार के तीन मासूम बच्चों की मौत दूध पीने के बाद हो गई। घटना से पूरे गांव में मातम पसर गया है और लोग सदमे में हैं।

राखी मनाने आए थे ननिहाल

मृतक बच्चों का परिवार मूल रूप से अरवल जिले का रहने वाला है। रक्षाबंधन के मौके पर सभी बच्चे अपनी मां के साथ पटना जिले के खिड़ी गांव ननिहाल आए थे। यहां ननिहाल में दूध रोजाना किसी दूसरे घर से खरीदा जाता था। परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन बच्चों ने रात का खाना खाने के बाद दूध पिया।

पेट दर्द के बाद बिगड़ी तबीयत

रात में तीनों बच्चों को अचानक तेज पेट दर्द की शिकायत हुई। परिजन तुरंत उन्हें पालीगंज अनुमंडलीय अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने इंजेक्शन लगाया, लेकिन दर्द में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद डॉक्टरों ने सलाह दी कि बच्चों को बड़े अस्पताल ले जाया जाए।

रास्ते में दो की मौत, तीसरे ने पीएमसीएच में दम तोड़ा

अस्पताल ले जाने के दौरान दो बच्चों की रास्ते में ही मौत हो गई। तीसरे बच्चे को पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

मृतकों की पहचान

मृत बच्चों के नाम इस प्रकार हैं:

  • विकास कुमार (5 वर्ष)

  • मोहित कुमार (3 वर्ष)

  • निधि कुमारी (6 वर्ष)

बच्चों के पिता मोहन ठाकुर गुजरात में प्राइवेट नौकरी करते हैं। घटना की खबर मिलते ही वह घर लौट आए। मां मीरा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।

गांव में मातम और गुस्सा

घटना के बाद मसदपुर गांव का माहौल गमगीन है। पड़ोसी और रिश्तेदार परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे, लेकिन गम इतना गहरा है कि शब्द भी बेअसर हो रहे हैं। गांव के लोग बच्चों को चंचल और खेल-खिलंदड़ बताते हैं। अचानक हुए इस हादसे ने सभी को हिला दिया है।

दूषित दूध की आशंका

हालांकि अभी तक मौत के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूध दूषित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग दूध का सैंपल लेकर जांच करेगा ताकि यह पता चल सके कि उसमें कोई हानिकारक तत्व था या वह खराब हो चुका था।

स्वास्थ्य विभाग की अपील

स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से दूध और अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को उबालकर इस्तेमाल करने की अपील की है। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उन्हें सुरक्षित और ताजा भोजन देना जरूरी है।

राखी का त्योहार बना मातम

यह घटना रक्षाबंधन के दिन हुई, जो आमतौर पर खुशी और पारिवारिक मिलन का पर्व होता है। बच्चों के ननिहाल आने का उद्देश्य त्योहार मनाना था, लेकिन इस हादसे ने खुशियों को मातम में बदल दिया।

जांच और प्रशासनिक कार्रवाई

स्थानीय पुलिस ने घटनास्थल का दौरा किया और परिजनों के बयान दर्ज किए। प्रशासन ने कहा है कि जांच में लापरवाही पाए जाने पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

अंतिम संस्कार और शोक

पोस्टमार्टम के बाद तीनों बच्चों के शव परिजनों को सौंप दिए गए। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। गांव में हर कोई गम में डूबा हुआ है और यह हादसा आने वाले वर्षों तक याद रखा जाएगा।

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