बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी अंतर्गत केसरिया प्रखंड के कैथवालिया गांव में विराट रामायण मंदिर का निर्माण तेजी से जारी है। यह मंदिर बनकर तैयार होने के बाद दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर होगा। लगभग 120 एकड़ में फैले इस विशाल परिसर को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से ऐतिहासिक माना जा रहा है। मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के साथ 22 अन्य मंदिर भी बनाए जाएंगे।
पूरे परिसर में कुल 18 शिखर होंगे, जो इसे भव्य स्वरूप प्रदान करेंगे। निर्माण कार्य के पूरा होने के बाद यह मंदिर न केवल बिहार, बल्कि देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।
दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग मंदिर परिसर में पहुंचा
विराट रामायण मंदिर परिसर में स्थापित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग अब मोतिहारी पहुंच चुका है। यह विशाल शिवलिंग तमिलनाडु के महाबलीपुरम से तैयार होकर बिहार लाया गया है। इसके पहुंचते ही मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है।
शिवलिंग की स्थापना को लेकर स्थानीय लोगों और भक्तों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। इसे देखने के लिए दूर-दराज से लोग पहुंच रहे हैं।
महावीर मंदिर ट्रस्ट कर रहा निर्माण कार्य
कैथवालिया में बन रहे विराट रामायण मंदिर का निर्माण पटना स्थित महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा कराया जा रहा है। ट्रस्ट के सचिव सायन कुणाल ने बताया कि मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 2030 तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उनके पिता दिवंगत आचार्य कुणाल किशोर का ड्रीम प्रोजेक्ट रहा है।
सायन कुणाल के अनुसार मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इनमें प्रवेश द्वार, गणेश स्थल, सिंह द्वार, नंदी प्रतिमा, शिवलिंग स्थल और गर्भगृह की नींव का कार्य शामिल है।
विशाल आकार और अनोखी वास्तुकला
विराट रामायण मंदिर का आकार इसे दुनिया के अन्य सभी मंदिरों से अलग बनाता है। यह मंदिर 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। मंदिर परिसर में कुल 18 शिखर बनाए जाएंगे, जिनकी ऊंचाई अलग-अलग होगी।
मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट रखी गई है। इसके अलावा चार शिखर 180 फीट ऊंचे होंगे। एक शिखर 135 फीट का होगा, आठ शिखर 108 फीट ऊंचे होंगे और एक शिखर की ऊंचाई 90 फीट तय की गई है। यह वास्तुकला मंदिर को एक अद्भुत पहचान देगी।
पटना से दूरी और कनेक्टिविटी
विराट रामायण मंदिर पटना से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भविष्य में सड़क और परिवहन सुविधाओं के बेहतर होने से यहां पहुंचना और आसान होगा। मंदिर के पूरा होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने की संभावना है।
इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि होगी।
17 जनवरी को होगा शिवलिंग का विधिवत स्थापना समारोह
मंदिर परिसर में विश्व के सबसे विशाल शिवलिंग की स्थापना 17 जनवरी को विधि-विधान के साथ की जाएगी। ट्रस्ट के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएंगी। इसके बाद 17 जनवरी को विशेष धार्मिक अनुष्ठान के साथ शिवलिंग की स्थापना की जाएगी।
इस अवसर पर हेलिकॉप्टर के माध्यम से शिवलिंग पर जलाभिषेक करने की भी योजना है। यह आयोजन मंदिर के इतिहास में एक विशेष अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
पांच तीर्थों के जल से होगा जलाभिषेक
शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए देश के पांच प्रमुख तीर्थ स्थलों से पवित्र जल मंगाया गया है। इनमें हरिद्वार, प्रयागराज, गंगोत्री, कैलास मानसरोवर और सोनपुर शामिल हैं। इन सभी तीर्थों के जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाएगा।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार यह आयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनेगा।
सहस्त्रलिंगम है यह विशाल शिवलिंग
विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाने वाला शिवलिंग एक सहस्त्रलिंगम है। इसका अर्थ है कि यह 1008 शिवलिंगों का प्रतीक माना जाता है। इस शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का अर्थ 1008 शिवलिंगों का पूजन करना माना जाता है।
इस विशाल शिवलिंग का वजन करीब 210 मीट्रिक टन है। इसे तमिलनाडु में तैयार किया गया था और 21 नवंबर को महाबलीपुरम से बिहार के लिए रवाना किया गया था।
कई राज्यों से होकर पहुंचा बिहार
शिवलिंग को महाबलीपुरम से सड़क मार्ग के जरिए बिहार लाया गया। यह आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से होते हुए बिहार पहुंचा। गोपालगंज के रास्ते सोमवार को इसे मोतिहारी के केसरिया लाया गया।
पूरे रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने शिवलिंग के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। यात्रा के दौरान यह एक धार्मिक यात्रा का रूप ले चुकी थी।
श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़, प्रशासन सतर्क
शिवलिंग के पहुंचते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। दर्शन के लिए सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
आने वाले दिनों में स्थापना समारोह के दौरान और अधिक भीड़ जुटने की संभावना है।
धार्मिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभरेगा मोतिहारी
विराट रामायण मंदिर के निर्माण से मोतिहारी और पूर्वी चंपारण जिले को एक नई पहचान मिलने जा रही है। यह मंदिर भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर का धार्मिक पर्यटन केंद्र बन सकता है।
मंदिर के पूरा होने के बाद बिहार के धार्मिक मानचित्र पर इसका विशेष स्थान होगा और यह क्षेत्र आस्था, संस्कृति और पर्यटन का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
मोतिहारी के कैथवालिया में बन रहा विराट रामायण मंदिर धार्मिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रहा है। दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना के साथ यह परियोजना अपने अहम चरण में पहुंच चुकी है। वर्ष 2030 तक पूरा होने वाला यह मंदिर आस्था, भक्ति और भव्यता का अद्वितीय संगम साबित होगा।
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