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बिहार: मुजफ्फरपुर के थाना परिसर से चोर उड़ा ले गए जब्त की गई लग्जरी कार, सीसीटीवी में कैद हुई घटना

KKN गुरुग्राम डेस्क | बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां शराब तस्करी के मामले में जब्त की गई एक लक्जरी कार को थाना परिसर से ही चुरा लिया गया। यह घटना मंगलवार और बुधवार की रात लगभग 2 बजे रामपुर हरि थाना की है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुआ, लेकिन किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।

चोरी की यह पूरी वारदात थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। हालांकि, फुटेज में चोरों के चेहरे स्पष्ट नहीं दिख पाए हैं। इस घटना ने जिले में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

थाना परिसर से हुई चोरी, पुलिस महकमे में मचा हड़कंप

थाना परिसर, जिसे आमतौर पर सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है, वहां से चोरों द्वारा एक जब्त लक्जरी कार चुराया जाना एक गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। मिली जानकारी के अनुसार, चोर रात करीब 2 बजे थाना परिसर में दाखिल हुए, बिना किसी डर या बाधा के कार को स्टार्ट किया और आराम से फरार हो गए।

कार वही थी, जिसे पुलिस ने 11 जून की रात टेंगराहा गोसाईपुर (मल्ल टोली) में 54 लीटर नेपाली ब्रांड की विदेशी शराब के साथ जब्त किया था। मुख्य आरोपी संतोष कुमार यादव उर्फ मिठाईलाल उस समय मौके से अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया था।

सीसीटीवी में कैद हुई वारदात, चेहरा नहीं आया सामने

रामपुर हरि थाना में लगे CCTV कैमरे ने घटना को रिकॉर्ड तो किया, लेकिन दुर्भाग्यवश कैमरे का एंगल ऐसा नहीं था कि चोरों की पहचान की जा सके। चोर कितने थे, किस दिशा से आए, और किस गेट से निकले — इन सभी बातों की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

पुलिस ने अब वीडियो फुटेज को क्लियर करने के लिए टेक्निकल एक्सपर्ट्स की मदद लेनी शुरू कर दी है। साथ ही, आसपास की सड़कों और मोहल्लों में लगे अन्य सीसीटीवी कैमरों की जांच भी की जा रही है।

SSP ने बनाई विशेष जांच टीम

घटना को गंभीरता से लेते हुए मुजफ्फरपुर एसएसपी सुशील कुमार ने तुरंत एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इस टीम को रामपुर हरि थाना सहित आसपास के क्षेत्रों में हर प्रकार की डिजिटल और मैन्युअल जांच का आदेश दिया गया है।

एसएसपी ने कहा:

“यह एक गंभीर सुरक्षा चूक है। इसमें जो भी पुलिसकर्मी लापरवाह पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।”

जांच टीम द्वारा अब तक की गई प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद पुलिसकर्मी गश्त पर नहीं थे या लापरवाह थे।

शराबबंदी के तहत जब्त हुई थी कार

बिहार में शराबबंदी कानून के तहत 2016 से शराब की बिक्री, सेवन और परिवहन प्रतिबंधित है। इसी कड़ी में पुलिस ने 11 जून को रात के समय टेंगराहा गोसाईपुर से छापा मार कर 54 लीटर विदेशी शराब के साथ यह लक्जरी कार जब्त की थी।

कार को मामले की अहम सबूत के तौर पर रामपुर हरि थाना में खड़ा किया गया था। लेकिन अब उसके चोरी हो जाने से पूरा मामला ही कानूनी रूप से कमजोर हो सकता है।

चोर कौन? उठ रहे हैं गंभीर सवाल

चोरी की इस घटना के बाद आम जनता और राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं:

  • क्या चोरी में थाना परिसर से जुड़ा कोई अंदरूनी व्यक्ति शामिल था?

  • आखिर पुलिसकर्मी ड्यूटी पर होते हुए भी जागरूक क्यों नहीं थे?

  • क्या शराब माफियाओं और पुलिस के बीच कोई मिलीभगत है?

इन सवालों के बीच लोग राज्य सरकार से सख्त जवाब और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

इससे पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब बिहार में थाना परिसर से सबूत या जब्त की गई चीजें गायब हुई हैं। पूर्व में भी कई मामलों में:

  • जब्त शराब रहस्यमय तरीके से गायब हो गई

  • थानों से मोटरसाइकिल और गाड़ियां चोरी हो चुकी हैं

  • सबूतों से छेड़छाड़ की शिकायतें मिली हैं

इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि बिहार के कई थानों में सबूतों की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है।

कानूनी रूप से बड़ा झटका

चोरी हुई कार एक सरकारी जब्ती थी, और इसका चोरी हो जाना अब एक अलग एफआईआर का मामला बन गया है। पुलिस ने नए मुकदमे में IPC की धारा 379 (चोरी), 457 (रात में चोरी), और 409 (सरकारी संपत्ति का गबन) जैसी धाराएं जोड़ दी हैं।

वहीं, मूल आरोपी संतोष यादव अभी भी फरार है। वाहन चोरी हो जाने से अब कोर्ट में पेश किए जाने वाले महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो चुके हैं, जिससे केस पर भी असर पड़ सकता है।

आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

पुलिस अब:

  • जिले की सभी सीमा चौकियों और टोल प्लाजा पर अलर्ट जारी कर रही है

  • वाहन नंबर ट्रेस करने के लिए हाईवे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर (ANPR) सिस्टम की मदद ले रही है

  • स्थानीय सूत्रों और मुखबिरों से जानकारी जुटा रही है

पुलिस विभाग ने आश्वासन दिया है कि जितने भी कर्मचारी लापरवाह पाए जाएंगे, उन्हें सस्पेंड या बर्खास्त कर दिया जाएगा।

बिहार में शराबबंदी और पुलिस की चुनौतियां

यह घटना एक बार फिर से यह उजागर करती है कि बिहार सरकार की शराबबंदी नीति को लागू करने में पुलिस को कितनी दिक्कतें आ रही हैं। शराब तस्करी, बॉर्डर से अवैध शराब की एंट्री, और स्थानीय स्तर पर मिलीभगत जैसी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं।

थाना परिसर से जब्त वाहन की चोरी से पुलिस की साख पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

मुजफ्फरपुर की यह घटना सिर्फ एक चोरी नहीं, बल्कि बिहार की पुलिस प्रणाली के भीतर की खामियों को उजागर करती है। अगर थाना परिसर ही सुरक्षित नहीं है, तो जनता कैसे पुलिस पर भरोसा करेगी?

यह घटना पुलिस के लिए एक चेतावनी है कि अब समय आ गया है जब सबूतों की सुरक्षा, ड्यूटी अनुशासन और जवाबदेही को लेकर सख्त कदम उठाने होंगे।

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