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30 सितंबर और 1 अक्टूबर 2025 को पूरे भारत में मिश्रित रहेगा मौसम

जैसे-जैसे भारत सितंबर के अंत की ओर बढ़ रहा है और अक्टूबर की शुरुआत हो रही है, देशभर में मौसम की स्थितियां जटिल होती जा रही हैं। भारत मौसम विभाग (IMD) ने अगले दो दिनों के लिए विशेष मौसम पूर्वानुमान जारी किया है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मौसम परिवर्तनों का अनुमान है। इस मौसम की स्थिति को प्रभावित करने वाला प्रमुख कारण इस वर्ष का देरी से हुआ मानसून का पुनः प्रवेश है, जो पूरे देश में मिश्रित मौसम स्थितियों का कारण बन रहा है।

30 सितंबर 2025 के मौसम का पूर्वानुमान

मानसून की देरी से मिश्रित मौसम की स्थितियां

इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रस्थान सामान्य से काफी देरी से हो रहा है। मानसून की सीमा इस समय 20°N/69°E, वेरावल, भरूच, उज्जैन, झांसी, शाहजहाँपुर से होकर 30°N/81°E तक पहुँच चुकी है। इस देरी के कारण, जहां सामान्यतः इस समय तक सूखा मौसम होता, वहीं अब भी कई हिस्सों में मानसूनी बारिश की संभावना बनी हुई है।

क्षेत्रवार मौसम का पूर्वानुमान

उत्तर-पश्चिम भारत

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में 30 सितंबर को हल्की बारिश और बादल छाने की संभावना है। इस क्षेत्र ने हाल ही में 37.5°C तक के उच्च तापमान का अनुभव किया था, जो पिछले दो वर्षों में सबसे गर्म सितंबर तापमान था। अब बारिश के बाद तापमान 35-36°C से गिरकर लगभग 32°C तक पहुँचने का अनुमान है, जिससे गर्मी से राहत मिलेगी।

राजस्थान और उत्तराखंड में 30 सितंबर को आंधी-तूफान के साथ बौछारों का अनुमान है, और राजस्थान में 30 सितंबर से 3 अक्टूबर तक यह स्थिति बनी रहेगी। जम्मू और कश्मीर तथा हिमाचल प्रदेश में भी 4 और 5 अक्टूबर को इसी तरह के मौसम की संभावना है।

पूर्वी भारत

बिहार में 30 सितंबर को मौसम साफ रहेगा और कहीं भी बारिश का पूर्वानुमान नहीं है। हालांकि, 1 अक्टूबर से तापमान 2-3°C तक बढ़ने की संभावना है, जिससे गर्मी और उमस का असर रहेगा। 2 अक्टूबर से 6 अक्टूबर तक बिहार में भारी बारिश हो सकती है और कई जिलों में बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।

पश्चिम बंगाल और झारखंड में 2 से 4 अक्टूबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है। गंगीय पश्चिम बंगाल में 2 अक्टूबर को भारी बारिश हो सकती है, जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 3 से 4 अक्टूबर तक बहुत भारी बारिश का अनुमान है।

पश्चिमी भारत

महाराष्ट्र में भारी बारिश के कारण हाल ही में 10 से अधिक मौतें और 11,800 से ज्यादा लोगों को बचाया गया था। हालांकि, 30 सितंबर को स्थिति में थोड़ी राहत मिल सकती है। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में 6 दिनों तक भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी, सिवाय 30 सितंबर के। गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्रों में 2 अक्टूबर तक भारी बारिश हो सकती है।

मुंबई में 30 सितंबर को हल्की बारिश और बादल छाए रहेंगे। यहां मानसून की गतिविधि अक्टूबर के मध्य तक जारी रहने की संभावना है, जो सामान्य रूप से 8 अक्टूबर को खत्म हो जाता है, लेकिन इस बार यह और बढ़ सकता है।

उत्तर-पूर्व भारत

उत्तर-पूर्व भारत के अधिकांश हिस्सों में 30 सितंबर को हल्की से मध्यम बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। असम और मेघालय में 2 से 3 अक्टूबर के बीच बहुत भारी बारिश हो सकती है, जबकि नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 अक्टूबर तक बौछारें जारी रहेंगी। अरुणाचल प्रदेश में 1 से 5 अक्टूबर के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

दक्षिणी भारत

दक्षिणी भारत के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है। उत्तर तमिलनाडु में 30 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है, जबकि तटीय आंध्र प्रदेश और यानम में 2 अक्टूबर तक बारिश जारी रहेगी। केरल, तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना और लक्षद्वीप में 30-40 किमी/घंटा की गति से तेज हवाएं चल सकती हैं।

1 अक्टूबर 2025 का मौसम पूर्वानुमान

तापमान में उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय भिन्नताएं

1 अक्टूबर से तापमान में महत्वपूर्ण परिवर्तन होने की संभावना है। हिमाचल प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों पर रात का तापमान सामान्य से 5.1°C तक अधिक रहने का अनुमान है। दिल्ली-एनसीआर में तापमान 25°C से 35°C के बीच रह सकता है, और हल्की बारिश जारी रहने की संभावना है।

बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए निम्न दबाव क्षेत्र से दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं में मजबूती आने का अनुमान है, जो महाराष्ट्र, गुजरात और पूर्वी राज्यों को प्रभावित करेगा।

मौसम चेतावनियाँ और अलर्ट

  • बिहार: 1 से 4 अक्टूबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है, और 4 से 5 अक्टूबर तक अत्यधिक बारिश की संभावना है। बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड और ओडिशा में 30-50 किमी/घंटा की गति से आंधी-तूफान की संभावना है।

  • पूर्वी और उत्तर-पूर्व भारत: इन क्षेत्रों में बिजली गिरने और आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

दीर्घकालिक मौसम प्रभाव

दक्षिण-पश्चिम मानसून की देरी से वापसी, जो सामान्यत: अक्टूबर 8 तक हो जाती है, इस वर्ष 17 अक्टूबर तक जारी रहने की संभावना है। इसका असर विभिन्न पहलुओं पर पड़ सकता है:

  • उमस और उच्च आर्द्रता: जिन क्षेत्रों में मानसून सामान्य समय पर समाप्त हो जाता है, वहां अब भी उमस बनी रहेगी।

  • सर्दी में देरी: इस देरी के कारण उत्तर भारत में सामान्य रूप से सर्दी की शुरुआत 2-3 सप्ताह पीछे हो सकती है।

  • कृषि पर असर: किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि मानसून के देर से खत्म होने से खरीफ फसलों की कटाई और रबी फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है।

  • शहरी बाढ़ का खतरा: भारी बारिश के कारण बिहार, पश्चिम बंगाल और गुजरात जैसे क्षेत्रों में शहरी बाढ़ का खतरा बना रहेगा।

तापमान की स्थिति

देशभर में कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान की स्थिति बनी हुई है:

  • हिमाचल प्रदेश: यहां अधिकांश स्थानों पर तापमान सामान्य से 5.1°C तक अधिक रहेगा।

  • पंजाब और पश्चिमी राजस्थान: इन क्षेत्रों में तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा।

  • दिल्ली: दिल्ली में 28.2°C का न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 5°C अधिक था।

जनहित और सुरक्षा उपाय

  • गर्मी से बचाव: उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में जहां तापमान अधिक रहेगा, वहां लोगों को गर्मी से बचने के उपाय करने चाहिए।

  • बाढ़ की तैयारियां: जिन क्षेत्रों में भारी बारिश का अनुमान है, वहां बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए तैयारी करनी चाहिए।

  • आंधी-तूफान से सुरक्षा: जिन क्षेत्रों में आंधी-तूफान की चेतावनी जारी है, वहां लोगों को सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करना चाहिए।

  • वायु गुणवत्ता: उच्च आर्द्रता और प्रदूषण के कारण शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता खराब हो सकती है, जो स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।

1 अक्टूबर से 7 अक्टूबर के बीच, मानसून की गतिविधियां जारी रह सकती हैं, हालांकि पश्चिमी भारत में स्थितियों में सुधार हो सकता है। हालांकि, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। भारत मौसम विभाग 30 सितंबर को शाम 4 बजे एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करेगा, जिसमें अक्टूबर 2025 के मौसम के बारे में और अधिक जानकारी दी जाएगी।

इस मौसम की स्थिति के साथ, भारत में मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण कृषि, शहरी जीवन और सामान्य जनजीवन पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस समय के दौरान, नियमित मौसम अपडेट और सावधानी बरतना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।

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