राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है क्योंकि बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव पर कानूनी शिकंजा कस गया है। Tejashwi Yadav Controversy अब दो राज्यों तक पहुँच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में FIR Against Tejashwi Yadav दर्ज की गई है। एक मुकदमा उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में और दूसरा महाराष्ट्र में दर्ज हुआ है।
शाहजहांपुर में दर्ज हुआ FIR
पहला मुकदमा शाहजहांपुर के सदर बाजार थाने में दर्ज किया गया। भाजपा महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता ने पुलिस को शिकायत दी। शिकायत में कहा गया कि आरजेडी के आधिकारिक X (पहले ट्विटर) हैंडल से 6:58 बजे सुबह एक पोस्ट किया गया। इस पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। शिकायतकर्ता ने पोस्ट की कॉपी को सबूत के तौर पर पेश किया। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
महाराष्ट्र में शिकायत
इसी मामले में महाराष्ट्र में भी शिकायत दर्ज की गई है। वहां भाजपा विधायक ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। उनका आरोप है कि तेजस्वी यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और इससे जनता की भावनाएं आहत हुई हैं। Maharashtra Complaint के आधार पर स्थानीय पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की जांच
दोनों राज्यों की पुलिस अब मामले की जांच में जुटी है। शाहजहांपुर पुलिस सोशल मीडिया पोस्ट की जांच कर रही है कि यह पोस्ट वास्तव में आरजेडी के आधिकारिक अकाउंट से किया गया या नहीं। महाराष्ट्र पुलिस शिकायतकर्ता से बयान ले रही है और यह देख रही है कि मामला किन धाराओं के अंतर्गत दर्ज किया जा सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
PM Modi Remark Case सामने आते ही राजनीति में तूफान खड़ा हो गया। भाजपा नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि किसी भी नेता को प्रधानमंत्री के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और जनता की भावनाओं को ठेस पहुँचाता है।
वहीं आरजेडी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि यह मुकदमे राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। उनका दावा है कि सत्ता पक्ष विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए पुलिस और प्रशासन का दुरुपयोग कर रहा है।
सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद
पूरा विवाद एक सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ। पोस्ट में कथित तौर पर प्रधानमंत्री मोदी पर अभद्र टिप्पणी की गई और साथ में उनकी तस्वीर लगाई गई। भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह का पोस्ट सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि प्रधानमंत्री के पद का अपमान है।
कानूनी पहलू
कानूनी जानकारों के अनुसार अगर आरोप साबित होते हैं तो तेजस्वी यादव पर मानहानि और जनभावनाओं को भड़काने से जुड़े धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। जांच का मुख्य बिंदु यह होगा कि पोस्ट का स्रोत क्या था और क्या इसमें तेजस्वी यादव की सीधी भूमिका थी।
शाहजहांपुर में भाजपा की भूमिका
शाहजहांपुर में यह मामला भाजपा महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता की शिकायत से शुरू हुआ। उन्होंने साफ कहा कि प्रधानमंत्री पर इस तरह की टिप्पणी अस्वीकार्य है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
महाराष्ट्र में विधायक की पहल
महाराष्ट्र में दर्ज शिकायत भाजपा विधायक ने की। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री का अपमान करना लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुँचाना है। उन्होंने पुलिस से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए।
आरजेडी के लिए बढ़ी मुश्किल
यह विवाद आरजेडी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है। पार्टी पहले से ही बिहार में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में तेजस्वी यादव पर लगे आरोप पार्टी की रणनीति को नुकसान पहुँचा सकते हैं। भाजपा अब इस मुद्दे को चुनावी बहस में भी शामिल कर सकती है।
तेजस्वी यादव की चुप्पी
अब तक तेजस्वी यादव ने इस मामले पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार वे कानूनी सलाह लेने में जुटे हैं। पार्टी समर्थक मानते हैं कि यह मुकदमे राजनीतिक दबाव का हिस्सा हैं।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बहस
यह मामला एक बार फिर राजनीतिक भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस को तेज करता है। विपक्ष का कहना है कि सरकार आलोचना को दबाने के लिए कानूनी कार्रवाई का सहारा ले रही है। वहीं सत्ता पक्ष का मानना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं कि प्रधानमंत्री पर अपमानजनक टिप्पणी की जाए।
अगर जांच पूरी हुई तो मामला अदालत तक जा सकता है। सबूत के तौर पर सोशल मीडिया पोस्ट, उसका डेटा और गवाहों के बयान अहम होंगे। अदालत तय करेगी कि क्या यह टिप्पणी वास्तव में अपराध की श्रेणी में आती है।
FIR Against Tejashwi Yadav ने बिहार और राष्ट्रीय राजनीति दोनों में हलचल मचा दी है। एक ओर भाजपा इस मुद्दे को गंभीर मान रही है, वहीं आरजेडी इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रही है। जांच के नतीजे और अदालत की दिशा तय करेंगे कि यह विवाद आगे कितना लंबा खिंचता है। लेकिन इतना तय है कि यह मामला आने वाले समय में बिहार की राजनीति पर गहरा असर डालेगा।
