दैनिक जागरण डांडिया उत्सव की दूसरी रात मुजफ्फरपुर में धूमधाम से मनाई गई। इस विशेष आयोजन में भोजपुरी अभिनेत्री आम्रपाली दूबे ने अपने प्रदर्शन से महफिल में चार चांद लगा दिए। शहर के लोग पारंपरिक और आधुनिक परिधानों में सजे-धजे हुए थे और ढोल-नगाड़ों की धुन पर थिरकते नजर आए। यह उत्सव सिर्फ एक संगीत और नृत्य का उत्सव नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति को एक साथ जोड़ने का एक अवसर भी था। मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि इस तरह के आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का अहम माध्यम हैं।
आम्रपाली दूबे ने बढ़ाया उत्सव का रंग
दूसरे दिन इस कार्यक्रम में भोजपुरी अभिनेत्री आम्रपाली दूबे ने जब मंच पर ठुमके लगाए, तो पूरा शहर उत्साह से भर गया। आम्रपाली के गानों पर लोग झूम रहे थे और उनकी झलक पाने के लिए युवा वर्ग दर्शकदीर्घा में बैठकर तालियां बजा रहे थे। आम्रपाली की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और उत्सव की रात को और भी खास बना दिया। वह मंच पर न केवल डांस कर रही थी, बल्कि अपनी अदाओं से भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रही थी।
दूसरी ओर, दर्शक भी हाथों में डांडिया स्टिक लेकर धूमधाम से नृत्य कर रहे थे। उनके चेहरे पर खुशी और उत्साह की लहर थी, और संगीत की धुन पर उनकी तालियां और कदम मिल रहे थे। यह आयोजन सिर्फ मनोरंजन का नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का अवसर था।
पारंपरिक और आधुनिक का मेल
इस आयोजन में पारंपरिक और आधुनिक परिधानों का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिला। रंग-बिरंगे कपड़े पहने महिलाएं जहां पारंपरिक डांडिया खेल रही थीं, वहीं युवा डीजे की धुन पर थिरक रहे थे। ढोल-नगाड़े की गूंज के बीच कार्यक्रम में पूरी तरह से भारतीय संस्कृति की महक आ रही थी। जगह-जगह जोड़े एकसाथ सामूहिक डांस कर रहे थे, और इस सामूहिकता में एक अलग ही प्रकार का उत्साह था।
इसके साथ ही, ढोल की थाप पर नृत्य करते युवा भारतीय परंपरा से जुड़ते हुए आधुनिक संगीत का भी आनंद ले रहे थे। पारंपरिक डांडिया और आधुनिक गीतों के इस मिश्रण ने इस उत्सव को खास बना दिया था। इसने दर्शकों को भारतीय संस्कृति के साथ-साथ समकालीन संगीत और नृत्य शैली से भी जोड़ने का कार्य किया।
मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता का बयान
इस भव्य आयोजन के दौरान मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने कहा कि डांडिया उत्सव जैसे आयोजन युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने में मदद करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के आयोजनों से हमारे युवा न केवल अपने सांस्कृतिक धरोहर को समझते हैं, बल्कि आधुनिक समय में इसे जीने का भी तरीका सीखते हैं। उनका मानना था कि इस प्रकार के उत्सव भारतीय परंपरा को जीवित रखते हुए भविष्य की पीढ़ी को इससे जोड़ते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस उत्सव में न सिर्फ संगीत और नृत्य का आनंद लिया गया, बल्कि भारतीय संस्कृति को सहेजने का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत किया गया। यह आयोजन दिखाता है कि किस प्रकार युवा अपनी परंपराओं को न केवल मानते हैं, बल्कि उन्हें नए तरीके से अपनाते भी हैं।
उत्सव का माहौल और जोश
दूसरे दिन के इस उत्सव में सैकड़ों की संख्या में शहरवासी उपस्थित थे। पूरे मैदान में उत्साह का माहौल था। पहले पंक्ति से लेकर अंतिम पंक्ति तक लोग डांडिया खेलते और नृत्य करते नजर आए। सभी की जोश और उमंग एक समान थी। हर कोई इस उत्सव में अपने आप को खोकर आनंद ले रहा था।
इस आयोजन में हर उम्र के लोग शामिल थे, चाहे वह बच्चे हों, युवा हों या बुजुर्ग। सभी का उत्साह और सहभागिता एक जैसा था। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक उत्सव था, बल्कि यह शहरवासियों के लिए एक मौका था, जहां वे अपने पुराने पारंपरिक खेलों को एक नए रूप में देख सकते थे और उनका आनंद ले सकते थे।
विविध संगीत और नृत्य शैलियों का संगम
डांडिया उत्सव के दौरान मंच पर बॉलीवुड, गुजराती, पंजाबी, बंगाली और भोजपुरी जैसे विभिन्न संगीत शैलियों की धुनों पर लोग झूम रहे थे। इसने उत्सव में विविधता की एक अलग ही लहर ला दी थी। बॉलीवुड के लोकप्रिय गानों पर लोग बड़े ही उत्साह के साथ नाच रहे थे, वहीं भोजपुरी और गुजराती गानों पर भी भीड़ का जोश देखने लायक था। हर गीत पर लोग अपनी पूरी तन्मयता से नृत्य कर रहे थे, और यह दिखा रहा था कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती, यह सभी को एक साथ जोड़ता है।
हर आयु वर्ग के लोग इस संगीत के जादू में बंधे थे। यह देखा गया कि लोग बिना थके, बिना रुके, पूरी रात इस उत्सव का आनंद ले रहे थे। नृत्य की धुन में एकता और खुशी का अहसास हो रहा था, और यह दर्शा रहा था कि भारतीय संस्कृति कितनी जीवंत है।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
यह डांडिया उत्सव शहर की संस्कृति को न केवल जीवित करता है बल्कि उसे एक नया आकार भी देता है। यह आयोजन युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का बेहतरीन तरीका है। इसके अलावा, यह आयोजन शहरवासियों के बीच सामाजिक सौहार्द और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देता है। लोग विभिन्न पृष्ठभूमियों और समुदायों से आते हैं, लेकिन इस तरह के आयोजनों में वे एक ही मंच पर एकत्र होते हैं और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनते हैं।
इसके अलावा, इस तरह के उत्सवों से स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी योगदान होता है। व्यापार, होटल और पर्यटन जैसी इंडस्ट्रीज़ को इसका लाभ मिलता है, क्योंकि लोग ऐसे आयोजनों के दौरान शहर का दौरा करते हैं और वहां का अनुभव साझा करते हैं।
दैनिक जागरण डांडिया उत्सव के इस दूसरे दिन ने यह साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं आज भी जीवित हैं। इस आयोजन ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि लोगों को एक नई ऊर्जा, एकता और संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया। आम्रपाली दूबे के साथ इस उत्सव ने शहरवासियों को एक यादगार अनुभव दिया। हर कदम और हर ध्वनि में भारतीय परंपराओं का उत्सव था, और यह दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति आज भी उतनी ही जीवंत और प्रभावशाली है जितनी पहले थी।
