KKN ब्यूरो। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों का मतदान 11 नवंबर को संपन्न होने के बाद लगभग सभी प्रमुख सर्वे एजेंसियों ने अपने एग्जिट पोल जारी कर दिए हैं। इन एग्जिट पोल के अनुसार, राज्य में एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकार बनने की प्रबल संभावना है, जबकि तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन को भारी झटका लगता दिख रहा है।
प्रमुख एग्जिट पोल परिणामों का सारांश
बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा के लिए कुल 14 प्रमुख सर्वे एजेंसियों ने एग्जिट पोल जारी किए हैं। सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा 122 सीटें है। सभी एग्जिट पोल में एनडीए को इस आंकड़े से काफी आगे दिखाया गया है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल में एनडीए और महागठबंधन को मिलने वाली अनुमानित सीटों की तुलना
सभी एजेंसियों के अनुमान
Matrize-IANS एग्जिट पोल ने एनडीए को सबसे अधिक 147-167 सीटें देते हुए स्पष्ट बहुमत का अनुमान लगाया है। इस सर्वे में महागठबंधन को 70-90 सीटें, जन सुराज को 0-2 सीटें और अन्य दलों को 2-10 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। वोट शेयर के मामले में एनडीए को 48%, महागठबंधन को 37% और अन्य को 15% वोट मिलने का अनुमान है।
Poll Diary का एग्जिट पोल सबसे आक्रामक अनुमान लेकर आया है, जिसमें एनडीए को 184-209 सीटें दी गई हैं, जो लगभग दो-तिहाई बहुमत के बराबर है। इस सर्वे में महागठबंधन को केवल 32-49 सीटें मिलने का अनुमान है।
Kamakhya Analytics ने एनडीए को 167-187 सीटें देते हुए प्रचंड बहुमत का संकेत दिया है, जबकि महागठबंधन को 51-71 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
JVC (Times Now) एग्जिट पोल में एनडीए को 135-150 सीटें, महागठबंधन को 88-103 सीटें, जन सुराज को 0-1 सीट और अन्य को 3-6 सीटें मिलने का अनुमान है।
People’s Pulse ने एनडीए को 133-159 सीटें और 46.2% वोट शेयर मिलने की भविष्यवाणी की है, जबकि महागठबंधन को 75-101 सीटें मिल सकती हैं।
Chanakya Strategies के एग्जिट पोल में एनडीए को 130-138 सीटें और महागठबंधन को 100-108 सीटें मिलने का अनुमान है। यह अकेला ऐसा सर्वे है जो महागठबंधन को 100 सीटों के पार दिखाता है।
दैनिक भास्कर के रिपोर्टर्स पोल में एनडीए को 145-160, महागठबंधन को 73-91 और अन्य दलों को 5-10 सीटें मिलने का अनुमान है।
NDTV Poll of Polls (पांच प्रमुख सर्वे का औसत) के अनुसार एनडीए को लगभग 152 सीटें, महागठबंधन को 84 सीटें, जन सुराज को 2 सीटें और अन्य को 5 सीटें मिलने की संभावना है।
पार्टी-वार सीट वितरण
Matrize-IANS के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 65-73 सीटें, जनता दल (यूनाइटेड) यानी JD(U) को 67-75 सीटें और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 7-9 सीटें मिल सकती हैं।
Poll Diary ने बीजेपी को सबसे अधिक 87-95 सीटें देते हुए इसे सबसे बड़ी पार्टी बताया है, जबकि जेडीयू को 81-89 सीटें मिल सकती हैं। इस सर्वे में एलजेपी-आर को 12-16, हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) को 5-6 और राष्ट्रीय लोकमोर्चा (RLM) को 4-5 सीटें मिलने का अनुमान है।
Chanakya Strategies के एग्जिट पोल में बीजेपी को 70-75 सीटें, जेडीयू को 52-57 सीटें और एलजेपी-आर को 14-19 सीटें मिलने का अनुमान है।
News18 Mega Exit Poll में बीजेपी को 55-65 सीटें और जेडीयू को 63-73 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जिसमें जेडीयू एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर सकती है।
महागठबंधन के घटक दल
Matrize-IANS में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को 53-58 सीटें और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को केवल 10-12 सीटें मिलने का अनुमान है।
Chanakya Strategies ने आरजेडी को सर्वाधिक 75-80 सीटें दी हैं, जो इसे विधानसभा में एकल सबसे बड़ी पार्टी बनाता है, लेकिन महागठबंधन कुल मिलाकर बहुमत से दूर रहेगा। कांग्रेस को इस सर्वे में 17-23 सीटें मिल सकती हैं।
P-Marq एग्जिट पोल में बीजेपी को 68-78, जेडीयू को 62-72, आरजेडी को 63-79 और कांग्रेस को 9-19 सीटें मिलने का अनुमान है।
News18 Mega में आरजेडी को 50-60 सीटें और कांग्रेस को 15-20 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि वामपंथी दलों को 10-15 सीटें मिल सकती हैं।
क्षेत्रवार विश्लेषण
Matrize-IANS ने बिहार को पांच प्रमुख क्षेत्रों में बांटकर विस्तृत क्षेत्रवार विश्लेषण प्रस्तुत किया है: अंगिका, भोजपुर, मगध, मिथिलांचल और सीमांचल।
बिहार के पांच प्रमुख क्षेत्रों में एनडीए, महागठबंधन और अन्य दलों को मिलने वाली अनुमानित सीटों का क्षेत्रवार विश्लेषण
मिथिलांचल – एनडीए का सबसे मजबूत क्षेत्र
मिथिलांचल क्षेत्र में कुल 71 विधानसभा सीटें हैं, जहां एनडीए को 50-55 सीटें मिलने का अनुमान है, जो इस क्षेत्र की 70% से अधिक सीटें हैं। महागठबंधन को यहां केवल 18-23 सीटें मिल सकती हैं। वोट शेयर में भी एनडीए को 47.7% और महागठबंधन को 36.5% वोट मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस क्षेत्र में सबसे अधिक ध्यान दिया था, जो परिणामों में दिख रहा है।
भोजपुर और मगध में भी एनडीए आगे
भोजपुर क्षेत्र की 67 सीटों में से एनडीए को 37-42 सीटें और महागठबंधन को 20-25 सीटें मिलने की संभावना है। वोट शेयर में एनडीए 48.4% और महागठबंधन 36.1% पर है।
मगध क्षेत्र की 51 सीटों में एनडीए को 30-35 सीटें और महागठबंधन को 17-22 सीटें मिल सकती हैं। यहां एनडीए का वोट शेयर 48.8% और महागठबंधन का 36.2% रहने की संभावना है।
अंगिका क्षेत्र की 30 सीटों में एनडीए को 20-23 सीटें और महागठबंधन को 7-10 सीटें मिलने का अनुमान है।
सीमांचल – एकमात्र प्रतिस्पर्धी क्षेत्र
सीमांचल बिहार का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां कांटे की टक्कर देखी जा रही है। इस क्षेत्र की 24 सीटों में एनडीए को 10-12 सीटें और महागठबंधन को 8-10 सीटें मिल सकती हैं। दिलचस्प बात यह है कि वोट शेयर में महागठबंधन 49.9% के साथ आगे है, जबकि एनडीए को 39.1% वोट मिलने की संभावना है। यह क्षेत्र मुस्लिम बहुल है और यहां महागठबंधन की मजबूत स्थिति है, लेकिन सीटों में एनडीए बढ़त बनाए हुए है।
मतदान प्रतिशत – रिकॉर्ड तोड़ भागीदारी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मतदाताओं ने अभूतपूर्व उत्साह दिखाया और 1951 के बाद से सर्वाधिक मतदान प्रतिशत दर्ज किया।
पहला चरण (6 नवंबर) में 121 सीटों पर 65.09% मतदान हुआ, जो पहले चरण के लिए अब तक का सर्वोच्च मतदान प्रतिशत था।
दूसरा चरण (11 नवंबर) में 122 सीटों पर 68.52% (अंतिम आंकड़ा 67.14% तक) मतदान दर्ज किया गया, जो दूसरे चरण के लिए रिकॉर्ड है।
कुल औसत मतदान 66.91% रहा, जो बिहार में 1951 के बाद से किसी भी विधानसभा या लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक है।
लिंग आधारित मतदान
महिला मतदाताओं ने इस चुनाव में अभूतपूर्व भूमिका निभाई। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6% रहा, जो पुरुषों के 62.8% से लगभग 9 अंक अधिक है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, “बिहार की माताओं और बहनों ने चुनाव आयोग पर पूरा भरोसा जताया है और 1951 से अब तक हुए सभी चुनावों में सबसे ज़्यादा 71% मतदान दर्ज किया है”।
विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार सरकार की महिला कल्याणकारी योजनाओं जैसे मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना और लक्ष्मी बाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना ने महिलाओं को एनडीए के पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित किया है।
जिलेवार सर्वोच्च मतदान
किशनगंज जिले ने सर्वाधिक 76.26% मतदान के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। यह बिहार का एकमात्र मुस्लिम बहुल जिला है। इसके बाद कटिहार (75.23%), पूर्णिया (73.79%), सुपौल (70.69%) और अररिया (67.79%) का स्थान है।
सीमांचल क्षेत्र के ये सभी जिले नेपाल सीमा के साथ स्थित हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों में उच्च मतदान राजनीतिक विश्लेषकों के लिए आश्चर्यजनक रहा।
मगध क्षेत्र के जमुई (67.81%), गया (67.50%) और कैमूर (67.22%) जिलों में भी उच्च मतदान देखा गया।
प्रमुख उम्मीदवार और चुनावी मुद्दे
नीतीश कुमार (जेडीयू) वर्तमान मुख्यमंत्री हैं और 2005 से (कुछ अंतराल को छोड़कर) लगातार इस पद पर हैं। उन्होंने विकास, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के मुद्दों पर चुनाव लड़ा।
तेजस्वी यादव (आरजेडी) महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। उन्होंने “पढ़ाई, दवाई, कमाई” का नारा देते हुए युवाओं को रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का वादा किया। वे अपने पारिवारिक गढ़ राघोपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां उनका मुकाबला भाजपा के सतीश कुमार से है।
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा है। हालांकि, सभी एग्जिट पोल में इस पार्टी को 0-5 सीटों के बीच सीमित दिखाया गया है, जो पार्टी के दावों से काफी कम है।
मुख्यमंत्री की पसंद
People’s Pulse के एग्जिट पोल में मुख्यमंत्री पद की पसंद पर सर्वे किया गया। इसके अनुसार, तेजस्वी यादव 32% वोटों के साथ पहली पसंद हैं, जबकि नीतीश कुमार 30% के साथ दूसरे स्थान पर हैं। प्रशांत किशोर और चिराग पासवान दोनों 8-8% के साथ बहुत पीछे हैं।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि व्यक्तिगत लोकप्रियता और सरकार बनाने की क्षमता में अंतर होता है। एनडीए को अधिक सीटें मिलने की संभावना के बावजूद तेजस्वी की व्यक्तिगत लोकप्रियता अधिक है।
2020 बनाम 2025 – एग्जिट पोल की सटीकता
बिहार में 2020 के विधानसभा चुनाव में अधिकांश एग्जिट पोल गलत साबित हुए थे। News18-Today’s Chanakya ने महागठबंधन को 180 सीटें और एनडीए को मात्र 55 सीटें दी थीं, जो वास्तविक परिणामों से बिल्कुल विपरीत था।
India Today-Axis My India ने भी महागठबंधन को 139-161 सीटें और एनडीए को 69-91 सीटें देते हुए महागठबंधन की जीत का अनुमान लगाया था।
वास्तविक परिणाम 2020 में एनडीए को 125 सीटें मिलीं और महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं। दिलचस्प बात यह है कि आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन सरकार नहीं बना सकी।
2025 के एग्जिट पोल में लगभग सभी 14 एजेंसियां एनडीए को स्पष्ट बहुमत दे रही हैं, जो 2020 से बिल्कुल विपरीत स्थिति है। यह एकरूपता या तो सर्वे की बेहतर गुणवत्ता का संकेत है या फिर समान त्रुटियों की पुनरावृत्ति हो सकती है।
प्रमुख निष्कर्ष और राजनीतिक संकेत
सभी एग्जिट पोल में एनडीए को 130 से 209 सीटों के बीच अनुमान दिया गया है, जो बहुमत के आंकड़े 122 से काफी ऊपर है। औसत के अनुसार, एनडीए को लगभग 145-165 सीटें मिल सकती हैं।
यदि ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो यह 20 वर्षों की सत्ता के बाद नीतीश कुमार के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। यह सत्ता विरोधी लहर के बावजूद एनडीए की मजबूती को दर्शाता है।
महागठबंधन की चुनौतियां
महागठबंधन को सभी एग्जिट पोल में 32 से 108 सीटों के बीच सीमित दिखाया गया है। यह 2020 के 110 सीटों से काफी कम है।
तेजस्वी यादव की युवा अपील के बावजूद, महागठबंधन महिला मतदाताओं और विकास के मुद्दे पर एनडीए से पिछड़ गया प्रतीत होता है। People’s Pulse के निदेशक डॉ. राजन पांडे ने कहा, “2020 में तेजस्वी यादव के पास युवाओं के बीच जो आकर्षण था, वह इस बार नहीं है”।
जन सुराज का निराशाजनक प्रदर्शन
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी, जिसने बड़े दावों के साथ चुनाव में प्रवेश किया था, सभी एग्जिट पोल में 0-5 सीटों तक सीमित है। चार एग्जिट पोल (Matrize, Poll Diary, TIF Research, दैनिक भास्कर) ने तो पार्टी को शून्य सीटें दी हैं।
यह पार्टी के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव लाने का दावा किया था।
महिला मतदाताओं की निर्णायक भूमिका
71.6% महिला मतदान और Matrize एग्जिट पोल के अनुसार 65% महिलाओं द्वारा एनडीए को वोट देने से यह स्पष्ट है कि महिलाएं इस चुनाव की निर्णायक शक्ति बन गई हैं।
नीतीश कुमार की सरकार ने महिलाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं, जो इस चुनाव में उनके पक्ष में काम करती दिख रही हैं। यह “MY” (Mahila-Yuva) समीकरण का “M” कारक है।
क्षेत्रीय विभाजन
मिथिलांचल और भोजपुर जैसे क्षेत्रों में एनडीए की मजबूत स्थिति है, जबकि सीमांचल में महागठबंधन प्रतिस्पर्धी है। यह दर्शाता है कि चुनाव में क्षेत्रीय कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
वापसी का संकेत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्जिट पोल स्पष्ट रूप से नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की वापसी का संकेत दे रहे हैं। लगभग सभी 14 प्रमुख सर्वे एजेंसियों ने एनडीए को स्पष्ट बहुमत का अनुमान दिया है, जो 2020 के एग्जिट पोल से बिल्कुल विपरीत स्थिति है।
रिकॉर्ड तोड़ मतदान, विशेष रूप से महिलाओं की भागीदारी, इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता रही है। 66.91% का कुल मतदान और 71.6% महिला मतदान बिहार के लोकतांत्रिक इतिहास में मील का पत्थर है।
हालांकि, 2020 में एग्जिट पोल की विफलता को देखते हुए, अंतिम परिणामों की घोषणा 14 नवंबर तक इंतजार करना होगा। वास्तविक मतगणना ही बताएगी कि क्या ये एग्जिट पोल सही साबित होते हैं या 2020 की तरह फिर से चूक जाते हैं।
यदि एग्जिट पोल सही साबित होते हैं, तो यह बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार के प्रभुत्व की पुष्टि होगी, जो 20 वर्षों की सत्ता के बाद भी मतदाताओं का विश्वास बनाए रखने में सफल रहे हैं। वहीं, महागठबंधन और विशेष रूप से तेजस्वी यादव को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।
