Home Bihar शपथ ग्रहण समारोह के बाद तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर नीतीश कुमार...

शपथ ग्रहण समारोह के बाद तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर नीतीश कुमार को बधाई दी

बिहार में 20 नवम्बर 2025 को एक ऐतिहासिक दिन था, जब नीतीश कुमार ने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। पटना के गांधी मैदान में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार के साथ 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहली बार नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। हालांकि, इस ऐतिहासिक समारोह में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपस्थिति की कमी महसूस हुई, वह थी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की।

तेजस्वी यादव ने इस शपथ ग्रहण समारोह में फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, जो कि उनके और नीतीश कुमार के बीच चल रहे राजनीतिक विवाद को और बढ़ा देता है। यह कोई नया मामला नहीं है, क्योंकि जब भी नीतीश कुमार एनडीए के साथ सरकार बनाते हैं, तेजस्वी यादव शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित नहीं होते हैं।

तेजस्वी यादव का ट्विटर से नीतीश कुमार को बधाई संदेश

हालाँकि तेजस्वी यादव शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से नीतीश कुमार और बिहार सरकार के मंत्रियों को बधाई दी। तेजस्वी यादव ने ट्विटर पर लिखा, “आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई। मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में शपथ लेने वाले बिहार सरकार के सभी मंत्रियों को हार्दिक शुभकामनाएँ। आशा है नई सरकार जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से लोगों की उम्मीदों और अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी और अपने वादों एवं घोषणाओं को पूरा करते हुए बिहारवासियों के जीवन में सकारात्मक और गुणात्मक परिवर्तन लाएगी।”

यह ट्वीट तेजस्वी यादव की विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद पहला सार्वजनिक संदेश था। चुनाव परिणाम आने के बाद यह उनका पहला बयान था, जिसमें उन्होंने सरकार के गठन के बाद शपथ लेने वालों को बधाई दी। तेजस्वी की पिछली ट्वीट 13 नवंबर को थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि विपक्ष सरकार बनाएगा। लेकिन जब 14 नवंबर को चुनाव परिणाम सामने आए, तो राजद को करारी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी को केवल 25 सीटें मिलीं, जिसके बाद तेजस्वी ने न तो कोई ट्वीट किया और न ही हार पर कोई आधिकारिक बयान दिया।

चुनावी हार के बाद तेजस्वी की चुप्पी और पारिवारिक कलह

राजद की हार के बाद तेजस्वी यादव की चुप्पी कई सवालों को जन्म देती है। 2025 के विधानसभा चुनाव में राजद को मिली करारी हार के बाद तेजस्वी ने न तो पार्टी की हार पर कोई टिप्पणी की और न ही किसी प्रकार का आधिकारिक बयान दिया। इस चुप्पी के बीच, लालू परिवार की अंदरूनी कलह भी सामने आई।

रोहिणी आचार्य, जो लालू यादव की परिवार से जुड़ी एक सदस्य हैं, ने अचानक राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने ट्विटर पर इस बात की घोषणा की, जिससे बिहार की राजनीति में एक नया हंगामा मच गया। इसके बाद, रोहिणी आचार्य पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए कह रही थीं कि उनका अब कोई परिवार नहीं है और उन्होंने तेजस्वी यादव, संजय यादव और रमीज पर गंभीर आरोप लगाए।

रोहिणी आचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ गाली-गलौज की गई और चप्पल मारा गया। इन विवादों के बीच, राजद के विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सभी जीते और हारे हुए उम्मीदवार शामिल हुए। इस बैठक में तेजस्वी यादव ने नेता प्रतिपक्ष बनने से इनकार किया और कहा कि वह एक कार्यकर्ता के तौर पर काम करेंगे। लेकिन बाद में लालू यादव और पार्टी के अन्य नेताओं ने उन्हें ही नेता प्रतिपक्ष के रूप में नियुक्त किया।

तेजस्वी यादव का नेता प्रतिपक्ष के रूप में नियुक्त होना

तेजस्वी यादव ने शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष बनने से मना किया था, लेकिन पार्टी नेतृत्व की सलाह पर उन्होंने इस जिम्मेदारी को स्वीकार कर लिया। उनकी नियुक्ति ने पार्टी के भीतर नेतृत्व को मजबूत किया है, लेकिन इस बीच पार्टी के भीतर जो पारिवारिक विवाद चल रहे हैं, उससे यह स्थिति और भी जटिल हो गई है। तेजस्वी यादव का नेतृत्व अब यह निर्धारित करेगा कि राजद 2025 के विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद किस दिशा में आगे बढ़ेगा।

तेजस्वी यादव के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि पार्टी की हार और पारिवारिक संघर्ष दोनों उनके सामने खड़े हैं। हालांकि, उनकी क्षमता और नेतृत्व से उम्मीद की जा रही है कि वह पार्टी को एकजुट कर सकते हैं और अगले चुनावों में राजद को एक मजबूत स्थिति में ला सकते हैं।

नीतीश कुमार का 10वीं बार मुख्यमंत्री बनना

नीतीश कुमार का 10वीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। उनका लगातार शासन और एनडीए के साथ गठबंधन बिहार में स्थिरता का प्रतीक बना है। हालांकि, उनके गठबंधन के फैसले पर विपक्ष द्वारा आलोचना की जाती रही है, लेकिन उनकी राजनीतिक धैर्य और सरकार बनाने की क्षमता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नीतीश कुमार का यह कार्यकाल बिहार के विकास, कानून व्यवस्था, शिक्षा और स्वास्थ्य सुधारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, उनकी राजनीतिक रणनीतियाँ और गठबंधन के फैसले उनके खिलाफ विवादों को जन्म देते हैं, फिर भी वह बिहार के प्रमुख नेता बने हुए हैं। अब यह देखना होगा कि इस कार्यकाल में नीतीश कुमार क्या बदलाव लाते हैं और कैसे राज्य में विकास की दिशा तय करते हैं।

विपक्ष की भूमिका और भविष्य

तेजस्वी यादव का शपथ ग्रहण समारोह से नदारद रहना और उनके परिवारिक विवादों के बीच उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, विपक्षी दलों का काम यह सुनिश्चित करना है कि सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए जाएं और जनता की उम्मीदों के अनुसार काम किया जाए। तेजस्वी यादव को अपनी पार्टी को फिर से खड़ा करने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

राजद का भविष्य इस पर निर्भर करेगा कि तेजस्वी यादव अपने विरोधियों के खिलाफ कैसे मोर्चा लेते हैं और पार्टी की छवि को कैसे सुधारते हैं। हालांकि, पार्टी में असहमति और परिवारिक विवादों के बावजूद, तेजस्वी यादव की अगुवाई में राजद बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा।

नीतीश कुमार का 10वीं बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेना बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण है। जहां एक ओर नीतीश कुमार का नेतृत्व महत्वपूर्ण है, वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव की चुप्पी और पारिवारिक विवादों ने विपक्ष की स्थिति को और जटिल बना दिया है। अब देखना यह होगा कि तेजस्वी यादव अपने नेतृत्व को कैसे साबित करते हैं और राजद को आने वाले चुनावों में किस तरह से नेतृत्व करते हैं।

Read this article in

KKN लाइव WhatsApp पर भी उपलब्ध है, खबरों की खबर के लिए यहां क्लिक करके आप हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर सकते हैं।

KKN Public Correspondent Initiative

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version