12 अगस्त 1942… बिहार के सारण जिले की गलियों में एक 26 वर्षीय महिला, हाथ में तिरंगा लिए, आजादी के नारों के साथ चल रही थी। पुलिस गोलियों की गूंज के बीच उसने अपने घायल पति के घावों पर साड़ी फाड़कर पट्टी बांधी और उसी तिरंगे को लेकर पुलिस स्टेशन पर चढ़ाई कर दी। यह कहानी है तारा रानी श्रीवास्तव की — एक ऐसी साहसी महिला स्वतंत्रता सेनानी की, जिसे इतिहास ने लगभग भुला दिया। इस एपिसोड में: • तारा रानी के पति फुलेंदु बाबू का बलिदान • ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनका संघर्ष • महिलाओं को आंदोलन में शामिल करने का अभियान • और वो कारण, जिनसे उनका नाम इतिहास के पन्नों से गायब हो गया अंजुमन में आपका स्वागत है। मैं हूं कौशलेन्द्र झा। आइए, इस प्रेरक और भावुक कर देने वाली कहानी को सुनते हैं, जो हमें बताती है कि असली आजाद सोच क्या होती है। #Anjuman #TaraRaniSrivastava #FreedomFighter
