एक किसान… नाम शंभू शरण भारतीय। मधेपुरा के राजपुर गांव से उठकर… 10 कट्ठा जमीन पर औषधीय खेती शुरू की… आज 113 प्रकार की जड़ी-बूटियाँ उगाते हैं… और कमाई इतनी कि देशभर में चर्चा हो रही है। क्या बिहार में औषधीय खेती सच में किसानों की जिंदगी बदल सकती है? क्या तुलसी, लेमनग्रास, खस, ब्राह्मी जैसी फसलों से लाखों की कमाई संभव है? क्या यह मॉडल बिहार के अन्य जिलों में भी काम कर सकता है? इस रिपोर्ट में देखें— ✔ शंभू शरण भारतीय की प्रेरक कहानी ✔ बंटी सिंह और धीरज मिश्रा जैसे किसानों की सफलता ✔ औषधीय खेती में लागत बनाम कमाई ✔ तुलसी, ब्राह्मी, लेमनग्रास की प्रति एकड़ आमदनी ✔ भारत में 120 अरब डॉलर के ग्लोबल हर्बल मार्केट की सच्चाई ✔ बिहार सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी, प्रशिक्षण व योजनाएँ ✔ बिहार के 15 जिलों में तेजी से बढ़ता औषधीय खेती का नेटवर्क औषधीय खेती… बिहार की कृषि में एक संभावित आर्थिक क्रांति का संकेत बन रही है। क्या आप भी इस बदलाव का हिस्सा बन सकते हैं? पूरी रिपोर्ट देखें।
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