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भारतीय सेनाओं में हेलीकॉप्टर संकट: दुर्घटनाओं से प्रभावित ऑपरेशन, सिविल हेलीकॉप्टरों पर निर्भरता बढ़ी

KKN गुरुग्राम डेस्क | भारतीय सेनाओं को हाल के वर्षों में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या का सामना करना पड़ रहा है। चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने पहले ही सैन्य अभियानों पर नकारात्मक प्रभाव डाला था, और अब ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) की दुर्घटनाओं के बाद सेनाओं को नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। 330 से ज्यादा ध्रुव हेलीकॉप्टरों के ग्राउंड होने के कारण सैन्य अभियानों में बाधा आई है, जिसके परिणामस्वरूप सेनाओं को सिविल हेलीकॉप्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।

पोरबंदर, गुजरात में 5 जनवरी को तटरक्षक बल का एक ध्रुव हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसके बाद हेलीकॉप्टर उड़ानों पर रोक लगा दी गई थी। इस हादसे ने पूरे हेलीकॉप्टर बेड़े की परिचालन क्षमता पर विपरीत प्रभाव डाला है। इस रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि ध्रुव हेलीकॉप्टर की दुर्घटनाओं ने सैन्य अभियानों को कैसे प्रभावित किया और सिविल हेलीकॉप्टरों पर निर्भरता बढ़ने के कारण क्या परिणाम सामने आए हैं।

हेलीकॉप्टर संकट का कारण और असर

भारतीय सेनाओं में हेलीकॉप्टर संकट का मुख्य कारण ध्रुव, चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की लगातार दुर्घटनाएं हैं। इनमें से ध्रुव हेलीकॉप्टर को भारतीय सेना, वायु सेना, नौसेना और तटरक्षक बलों द्वारा प्रमुख रूप से उपयोग किया जाता है। ये हेलीकॉप्टर सर्वे illance, टोही मिशन, और लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए आवश्यक होते हैं। हालांकि, हेलीकॉप्टरों के लगातार दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण इनकी उपलब्धता प्रभावित हो गई है।

सेना की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने के कारण, सैन्य अभियान और अग्रिम क्षेत्रों में टोही मिशन बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सैन्य अभियानों में वायु शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन हेलीकॉप्टरों की कमी और उनकी कार्यशीलता में कमी आने से सेना की समय पर प्रतिक्रिया क्षमता कम हुई है।

सैन्य हेलीकॉप्टरों का बेड़ा: किसके पास कितने हेलीकॉप्टर?

ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (ALH) का सबसे बड़ा बेड़ा भारतीय सेना के पास है, जिसमें 180 से अधिक हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इन हेलीकॉप्टरों में से लगभग 60 रुद्र हेलीकॉप्टर हैं, जो विशेष रूप से हथियारबंद संस्करण होते हैं और कांबेट मिशनों में प्रयोग किए जाते हैं।

  • भारतीय सेना के पास: 180 से अधिक ध्रुव हेलीकॉप्टर, जिनमें से 60 रुद्र हेलीकॉप्टर हैं।

  • भारतीय वायु सेना के पास: 75 हेलीकॉप्टर

  • भारतीय नौसेना के पास: 24 हेलीकॉप्टर

  • तटरक्षक बल के पास: 19 हेलीकॉप्टर

इन हेलीकॉप्टरों का प्रमुख कार्य सीमा क्षेत्रों में सर्वेillance और रक्षा मिशन है। लेकिन अब इन हेलीकॉप्टरों के ग्राउंड होने के कारण सेना को सिविल हेलीकॉप्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो सैन्य मिशनों के लिए उपयुक्त नहीं होते।

सिविल हेलीकॉप्टरों का सहारा: अस्थायी समाधान

भारतीय सेना के पास अब सिविल हेलीकॉप्टरों का सहारा लिया जा रहा है, क्योंकि सैन्य हेलीकॉप्टरों की उपलब्धता कम हो गई है। हालांकि, सिविल हेलीकॉप्टर सैन्य अभियानों के लिए उपयुक्त नहीं होते हैं क्योंकि इनमें आवश्यक रडार सिस्टम, हथियार, और सुरक्षा फीचर्स नहीं होते। इसके अलावा, सिविल हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा और कर्मचारी प्रशिक्षण सैन्य हेलीकॉप्टरों के मुकाबले कम होता है, जिससे मिशन की सफलता पर असर पड़ सकता है।

सिविल हेलीकॉप्टरों का उपयोग आपातकालीन स्थितियों में किया जा सकता है, लेकिन सैन्य अभियान और सीमा सुरक्षा जैसे संवेदनशील मिशनों के लिए इन्हें उपयुक्त नहीं माना जा सकता। सिविल हेलीकॉप्टरों की सीमित उपलब्धता और सामान्य रूप से उपयोग में लाए जाने वाले इंजन और टेक्नोलॉजी सेना के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

हेलीकॉप्टर दुर्घटनाओं का असर: सैन्य ऑपरेशन्स पर प्रभाव

भारतीय सेनाओं के लिए हेलीकॉप्टरों का प्रयोग हजारों किलोमीटर की ऊँचाई में सैन्य ऑपरेशन्स को करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन हेलीकॉप्टरों का उपयोग सैन्य साजो-सामान और जवानों की त्वरित तैनाती के लिए किया जाता है, खासकर सीमा क्षेत्रों में। हेलीकॉप्टरों की कमी के कारण, सेना की लॉजिस्टिक क्षमता पर भारी असर पड़ा है।

  • सीमा क्षेत्रों में ऑपरेशन्स: हेलीकॉप्टरों के बिना, अग्रिम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों को वायु से आपूर्ति और सहायता मिलना मुश्किल हो गया है।

  • सर्वेillance और टोही मिशन: सेना की सुरक्षा और खुफिया जानकारी प्राप्त करने की क्षमता भी कमजोर हुई है।

  • आपातकालीन स्थिति में प्रतिक्रिया: आपातकालीन मिशन जैसे सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन्स भी प्रभावित हुए हैं।

इन मुद्दों ने भारतीय सैन्य संचालन की क्षमता और मिशन को निष्पादित करने की क्षमता पर गंभीर असर डाला है।

सेना की तैयारियों का भविष्य: हेलीकॉप्टरों का आधुनिकीकरण और नई खरीदारी

भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना के लिए यह जरूरी है कि हेलीकॉप्टरों का आधुनिकीकरण और नए हेलीकॉप्टरों का अधिग्रहण जल्द से जल्द किया जाए। भारतीय रक्षा मंत्रालय और सरकार इस संकट का समाधान करने के लिए स्वदेशी हेलीकॉप्टर परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर (LCH) और मध्यम लिफ्ट हेलीकॉप्टर (MLH) जैसी परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जो भविष्य में सेनाओं की हवा में ताकत को मजबूत करेंगे।

इसके अलावा, सरकार द्वारा ध्रुव हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा और विश्वसनीयता में सुधार के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। मेडिकल, सर्च एंड रेस्क्यू और टोही ऑपरेशन्स के लिए नए हेलीकॉप्टरों का आयात और स्वदेशी उत्पादन पर जोर दिया जा रहा है।

भारतीय सेनाओं में चल रहे हेलीकॉप्टर संकट ने सैन्य संचालन को प्रभावित किया है। ध्रुव, चीता और चेतक हेलीकॉप्टरों की दुर्घटनाओं के कारण सैन्य तैयारियों में कमी आई है, लेकिन सरकार और सेना इसके समाधान के लिए स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। सिविल हेलीकॉप्टरों का उपयोग एक अस्थायी उपाय हो सकता है, लेकिन सैन्य हेलीकॉप्टरों की जरूरत को पूरा करने के लिए नई तकनीक और आधुनिक हेलीकॉप्टरों की खरीदारी आवश्यक है।

भारतीय सेनाओं की क्षमता को बढ़ाने के लिए यह जरूरी है कि हेलीकॉप्टरों की विश्वसनीयता और संचालन क्षमता को बढ़ाया जाए। इसके साथ ही, भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूत करके स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए ताकि भविष्य में ऐसे संकट से बचा जा सके।

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