उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में रविवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। हादसा तब हुआ जब एक बोलेरो वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सरयू नहर में गिर गया। इस भीषण दुर्घटना में 11 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हादसा उस वक्त हुआ जब सभी लोग जिले के खरगूपुर स्थित पांडवकालीन प्रसिद्ध पृथ्वीनाथ मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए जा रहे थे।
नहर के किनारे फिसलन बना हादसे का कारण
हादसा मोतीगंज थाना क्षेत्र के सीहागांव-खरगूपुर मार्ग के पास हुआ, जहां भारी बारिश के चलते सड़क पर फिसलन हो गई थी। बोलेरो वाहन की रफ्तार अधिक बताई जा रही है और इसी वजह से वाहन अचानक नियंत्रण से बाहर हो गया और सीधा सरयू नहर में जा गिरा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन के पानी में गिरते ही आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया।
स्थानीय लोगों ने निभाई अहम भूमिका
स्थानीय ग्रामीणों ने नदी में डूबी बोलेरो के शीशे तोड़कर एक-एक कर यात्रियों को बाहर निकाला। चार लोगों को गंभीर हालत में एंबुलेंस की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। घायलों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जताया दुख
इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि राहत और बचाव कार्य में तेजी लाई जाए और घायलों को हरसंभव चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है।
पूरे गांव में पसरा मातम
इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी लोग सीहागांव के रहने वाले थे। दो परिवारों के कुल 15 लोग बोलेरो से मंदिर जा रहे थे। धार्मिक आस्था से भरे इस सफर ने किसी को भी यह अंदेशा नहीं था कि वह उनके जीवन का आखिरी सफर साबित होगा। हादसे की खबर जैसे ही गांव में पहुंची, वहां शोक की लहर दौड़ गई। परिजन और ग्रामीण रो-रोकर बेहाल हो गए। गांव में मातम का माहौल है और हर कोई इस अकल्पनीय घटना से दुखी है।
बारिश के कारण और भी बढ़ी कठिनाई
लगातार हो रही बारिश की वजह से सड़क की हालत पहले से ही खराब थी। इस पर न तो कोई सुरक्षात्मक रेलिंग थी और न ही चेतावनी संकेत। ऐसे में बोलेरो जैसे भारी वाहन का नहर में गिरना यह दर्शाता है कि स्थानीय प्रशासन को सड़कों की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
सीएम के निर्देश के बाद प्रशासन सक्रिय
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों की निगरानी की। मृतकों के शवों को विधिवत पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।
पूरे प्रदेश में सड़क सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद एक बार फिर राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में बनी संकरी और असुरक्षित सड़कें हादसों को निमंत्रण देती नजर आती हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि सरकार को इन सड़कों पर रेलिंग, संकेत और उचित रोशनी की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
समाज में एक बार फिर जगी मानवता की भावना
इस दर्दनाक घटना के बीच यह राहत की बात रही कि हादसे के तुरंत बाद गांववालों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घायलों की जान बचाई। यह दिखाता है कि आज भी हमारे समाज में इंसानियत और सहयोग की भावना जिंदा है।
सरकारी सहायता के अलावा चाहिए दीर्घकालिक समाधान
राज्य सरकार ने भले ही मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है, लेकिन केवल मुआवजे से समाधान नहीं होगा। जरूरी है कि सरकार और प्रशासन मिलकर सड़क सुरक्षा, पुल-पुलियों की मरम्मत और ग्रामीण इलाकों में यातायात प्रबंधन को सुदृढ़ करें।
गोंडा की यह दुर्घटना न सिर्फ एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि यह पूरे प्रदेश के लिए एक चेतावनी भी है। जब तक सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी, ऐसे हादसे होते रहेंगे। मुख्यमंत्री की संवेदना के साथ-साथ प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे ताकि लोगों की जिंदगी यूं ही असमय खत्म न हो। इस हादसे ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक यात्रा भी तभी शुभ होती है जब सुरक्षा का साथ हो।
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