रक्षा के क्षेत्र में महिलाओं के बढ़ते कदम

विश्व की 16 देशो में रक्षा मंत्रालय का कमान सम्भाल रही हैं महिलाएं

भारत ने देश के सबसे अहम और शक्तिशाली रक्षा मंत्रालय का जिम्मा एक महिला निर्मला सीतारमण के हाथो में सौंप कर सत्ता में महिलाओं के बढ़ते कद का स्पष्ट संकेत दे दिया है। इससे पहले विश्व के पंद्रह देशो में रक्षा मंत्रालय का काम महिलाएं संभाल रही हैं। भारत को मिलाकर अब ऐसे देशों की संख्या 16 हो गई है। जिन देशों में रक्षा मंत्री महिलाएं हैं उनमें हमारा पड़ोसी बांग्लादेश भी शामिल है। इसके अतिरिक्त दक्षिण अफ्रीका, नीदरलैंड, निकारागुआ, केन्या, अल्बेनिया, नार्वे, जर्मनी, इटली, बोस्निया, स्लोवेनिया, आस्ट्रेलिया, स्पेन, मैसीडोनिया और फ्रांस शामिल हैं।
रक्षा मंत्रालय जैसे अतिसंवेदनशील मंत्रालय का जिम्मा पुरुषों को ही सौंपे जाने की परंपरा रही थी। श्रीलंका ने सबसे पहले इस परंपरा को तोड़ा था। उस वक्त श्रीलंका को सीलोन नाम से जाना जाता था। श्रीलंका में एक नहीं बल्कि दो बार किसी महिला को रक्षामंत्री बनाया गया। दुनिया में पहली बार रक्षा मंत्री की कमान महिला के हाथ में देने की पहल सीलोन (1972 से पहले श्रीलंका का नाम) ने 1960 में की थी। उस वक्त इस देश की कमान पूरी तरह से महिला के हाथ में ही थी। यानि उस वक्त प्रधानमंत्री पद पर भी सिरमाओ भंडारनाये काबिज थीं। तब प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए ही सिरिमाओ भंडारनायके ने रक्षा मंत्रालय को भी अपने पास ही रखा था। इसके बाद वह 1970 से 1977 तक दोबारा प्रधानमंत्री बनी और तब भी रक्षा मंत्री का प्रभार अपने पास ही रखा।
वर्तमान में बांग्लादेश के रक्षामंत्रालय की कमान भी महिला के हाथ ही है। यहां की प्रधानमंत्री शेख हसीना स्वयं ही रक्षा मंत्रालय को संभाल रही हैं। इक्वाडोर एक देश है, जहां रक्षामंत्रालय की कमान महिला को तो मिली लेकिन वह इस पद पर केवल नौ दिन ही रह पाईं। इक्वाडोर की रक्षा मंत्री गुआडाल्यूप लारिवा सबसे कम सिर्फ 9 दिन के लिए रक्षामंत्री रही। दरअसल 15 जनवरी 2007 को उन्होंने रक्षा मंत्री की कमान संभाली और 24 जनवरी को उनकी मृत्यु हो गई। वह पांच सैन्य अधिकारियों के साथ हैलीकॉप्टर में जा रही थीं जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
मौजूदा समय में एशिया के 50 मुल्कों में सीतारमण इकलौती पूर्ण कालिक महिला रक्षामंत्री हैं। हालांकि, पड़ोसी बांग्लादेश में रक्षामंत्रालय का प्रभार प्रधानमंत्री शेख हसीना के पास है। लेकिन यह जिम्मेदारी उनके पास अतिरक्ति प्रभार के रूप में है। इससे पहले भारत ने भी इसी परंपरा का निर्वाह किया था जब 30 नवंबर 1975 को भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पद पर रहते हुए रक्षामंत्रालय का अतिरक्ति प्रभार संभाला था। लेकिन अब देश की दूसरी रक्षामंत्री एक महिला तो हैं ही साथ ही एशिया में पूर्णकालिक तौर पर इस पद को संभालने वाली वह एकमात्र महिला हैं।