देश-दुनिया के लिए बानगी है मीनापुर का भटौलिया गांव

 देश की सीमा से लेकर विदेशो मे भी है गांव की धमक/ बीडीओ-सीओ से लेकर दर्जनो है बैंक अधिकारी/ कर्नल से लेकर चार्टेड अकाउंटेड की कोई कमी नही/ गांधी को महात्मा बनाने वाले राजकुमार शुक्ल का ससुराल इसी गांव मे

संतोष कुमार गुप्ता
मीनापुर। मुजफ्फरपुर जिले के मीनापुर प्रखण्ड मुख्यालय से 12 किलोमीटर सुदूर ग्रामीण इलाका है भटौलिया गांव। किंतु यह गांव देश दुनिया के लिए बानगी है। पहले तो यह गांव की माली हालत ठीक नही थी।

लेकिन अब भटौलिया गांव की पहचान दूसरी है।  यह गांव देश की सीमा से लेकर विदेशो मे भी अपनी पहचान बनायी है। शिक्षा का क्षेत्र हो या पुलिस की पहरेदारी का इस गांव का अपना महत्व है। गांव के करीब तीन सौ जवान सेना मे है। सौ से अधिक लोग कर्नल से लेकर सिपाही पद को सुशोभित कर रहे है। जयदीप राणा सउदी अरब मे चार्टेड एकांउटेँट है। इनकी पत्नि सोनिया राणा बहरीन मे उच्चाधिकारी है। सुबोध कुमार राणा दक्षिण अफ्रिका के कांगो मे संयुक्त राष्ट्र संघ का शांतिदूत है। गांव के कई लोग रेजिमेँट का कमांडेट है। राणा गणेश प्रसाद ज्वाइंट कमिश्नर है। रामप्रसाद राणा कस्टम एसपी का पद सुशोभित कर रहे है। सच्चिदानंद राणा कॉलेज मे प्रिसिंपल है।  इस साल भी कई लोग बैंक अधिकारी के पद पर गये है। यह चंद बानगी है भटौलिया गांव की। कई लोग गांव मे नवरात्रा देखने विदेश से यहा पहुंच रहे है।  भटौलिया गांव के रोम रोम मे देवी श्लोक गूंज रहे है.लोगो का कहना है की मनोकमनापूर्ण देवी मां  दुर्गा का यह प्रताप है।
गांव की शान है ये लोग

भटौलिया गांव मे सरकारी अफसरो की कमी नही है। जिस क्षेत्र मे जायें,वहां पर इनकी धमक है। आकंड़ो मे इस गांव की अलग पहचान है।

डॉक्टर(एमबीबीएस)-04, इंजिनियर-27. बैंक मैनेजर-01. ज्वाइन कमिश्नर-01. कस्टम एसपी-1.  प्रोफेसर-5, प्रिसिंपल-01, टीचर-08, चार्टेड अकाउंटेड–8, आर्मी-300, पुलिस-150, आरपीएफ-15, सीओ-1, बीडीओ-1, दरोगा-5
नीलहा आंदोलन का नींव भटौलिया मे

गांधी को महात्मा बनाने वाले राजकुमार शुक्ल की शादी भटौलिया गांव मे ही हुई थी। उनकी पत्नी केवला देवी ने चम्पारण सत्याग्रह से लेकर निलहा आंदोलन को आगे बढाने मे काफी सहयोग किया था। केवला का नाम अब भी गांव मे केवली फुआ के नाम से प्रसिद्ध है। राजकुमार शुक्ल ने इसी गांव मे निलहा आंदोलन का पृष्ठभूमि तैयार किया था। दरअसल केवला के भाई रामपत राणा की जमींदारी राजकुमार शुक्ल के गांव सतवरिया मे चलती थी। राजकुमार शुक्ल व उनकी पत्नी केवला कई बार महात्मा गांधी व डॉ राजेंद्र प्रसाद के साथ मिटिंग कर चम्पारण सत्याग्रह आंदोलन को आगे बढाया। जब राजकुमार शुक्ल पर वारंट हुआ तो वह इसी गांव मे भूमिगत हुए थे। राजकुमार शुक्ल की पुत्री की शादी भटौलिया मे ही हुई थी.

आजादी की लडाई मे गांव का अविस्मरणिय योगदान

आजादी की लडाई मे भटौलिया गांव का अविस्मरणिय योगदान है. गांव के रामाज्ञा जसौदी का नाम आज भी शान से लिया जाता है। वह सुभाष चंद्र बोस के आजाद हिंद फौज के सदस्य थे। 1962 मे भारत चीन के युद्ध मे अनिरूद्ध राणा मारे गये थे। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन मे बिजली राणा ने भाग लिया था।

दुसरा कामरुप कामख्या है भटौलिया का मां दुर्गा
उम्र के अंतिम पड़ाव मे चल रहे मुख्य यजमान रामसरेख राणा बताते है की भटौलिया मे 17 वर्षो से धुमधाम से पूजा होती है। उनके पूर्वज राजस्थान के मेवाड़ जिले के गढ़ गंगवार गांव से आकर बसे है। यहां सभी भाव राणा के वशंज है। गांव के लोगो की कुल देवता ट्रीपल सुंदरी है। भाव राणा ने ही भटौलिया गांव मे कामरुप कामख्या से ज्योतिर्लिँग लाकर स्थापना की थी। आज भी नवरात्रा समाप्ति के बाद भी सवा महिने तक देवी का पाठ किया जाता है। देश मे कामरुप कामख्या के बाद भटौलिया मे ही सवा महिने तक पाठ होता है। पूजा समिति के अध्यक्ष प्रभुनाथ राणा,धनरंजन राणा प्रेमसागर राणा,विशुनदेव राणा,अशोक राणा,सुनिल राणा,उमाशंकर राणा,विधा राणा,चंद्र कुमार राणा बताते है की भटौलिया की जमीन कभी परसौनी स्टेट की संपति थी। किँतु कालांतर मे स्टेट ने ताम्रपत्र पर सात सौ एकड़ जमीन दान मे दे दिया गया।

मुरादे पुरी करती है भटौलिया की कामरूप कामख्या

वासंतिक नवरात्रा मे देवी श्लोक से भटौलिया का कोना कोना गूंज उठा है। इस बार भटौलिया गांव मे देवलोक व दानवलोक का युद्ध आकर्षण का केंद्र होगा। ज्वालामुखी के लावा से निकल रहा दानव व कैलाश पर्वत से शिव के सिर से निकल रहा गंगा और  महिषासुर का संहार कर रही मां दुर्गा का विहंगम दृश्य कौतूहल का केंद्र है। कोलकत्ता आसनसोल के मूर्तिकार राखोहरी सुत्रधर बेजोड़ कलाकृति को अंतिम रूप दे रहे है। मनोकामना पूर्ण होने पर मंदिर परिसर मे अष्टयाम कराने वालो की कतारे लगी है। रामधुन से इलाका का कोना कोना गूंज उठा है। आचार्य अरूण मिश्र के वैदिक मंत्रोच्चारण से क्षेत्र का कोना कोना गूंज उठा है।

दानवीरो की है लंबी कतारे

मनोकामना पूर्ण होने पर बंगलोर से एक युवती पहुंच रही है। वह माता का भव्य श्रंगार करायेगी। छपड़ा के श्री शर्मा कैंसर से पीड़ित थे.जब वह ठीक हो गये है तो महाश्रंगार करायेंगे। विधा महाराज की ओर से अष्टयाम किया जा रहा है। गांव के लड़का आर्थिक विपन्नता से गुजर रहा था.जब आर्थिक स्थिति मे सुधार हुआ तो 21 हजार रूपया गहबर मे चंदा दिया है। शहर के मणिभूषण शर्मा को एयरफोर्स मे नौकरी मिली तो 21 हजार नगद चढाया है।  धर्मपुर गांव के देवेंद्र साह ने पिछले साल सरकारी नौकरी के लिए मन्नते मांगी थी। उनका नौकरी रेलवे मे लग गया तो उन्होने मंदिर मे तेरह हजार रूपया का आर्थिक सहायता की है। कई ऐसे लोगो ने भी मंदिर मे सहयोग किया है जिनका सूना गोद भर गया है। जिनकी आंख की रौशनी लौट गयी है। कई अस्पतालो से लौटने के बाद उनका पुत्र स्वस्थ्य हो गया है। ऐसे लोगो की संख्या सैकड़ो मे है । पुरा गांव सात्विक आहार लेकर भक्ति भावना की मिसाल पेश की है।

15 रूपये की सहयोग राशि पर पांच लोग जायेंगे वैष्णो देवी

भटौलिया गांव मे इस बार 15 रूपये की सहयोग राशि जमा करने वाले भाग्यशाली साबित हो सकते है। श्रद्धालु 15 रूपये की सहयोग राशि जमाकर अपना नाम दर्ज करा सकते है। अंतिम दिन पांच भाग्यशाली विजेताओ का नाम लॉटरी से निकाला जायेगा। सभी पांच लोगो को पूजा समिति अपने खर्च से वैष्णो देवी दर्शन के लिए परिभ्रमण पर भेजेगी

साथ ही मेले मे नवमी के रोज आयोजित चिकित्सा शिविर मे नामचीन डॉक्टर शिरकत करेंगे।