कल्पना कीजिए—एक व्यक्ति आंखें बंद करके ‘ॐ’ का उच्चारण कर रहा है। उसके सामने न कोई दवा है, न कोई मशीन, न कोई चिकित्सकीय उपकरण। वैज्ञानिक उसके मस्तिष्क की गतिविधियां दर्ज कर रहे हैं, हृदय की धड़कन माप रहे हैं और तनाव से जुड़े संकेतों का अध्ययन कर रहे हैं। यह किसी धार्मिक कथा का दृश्य नहीं, बल्कि भारतीय मंत्रों और ध्यान-पद्धतियों पर हुए वास्तविक वैज्ञानिक अनुसंधान की दुनिया है।
लेकिन क्या इन प्रयोगों ने साबित कर दिया है कि दुर्गा पूजा के मंत्र मनुष्य को स्वस्थ बनाते हैं? क्या नवार्ण मंत्र, दुर्गा सप्तशती का पाठ, शंखध्वनि या आरती का शरीर पर कोई मापने योग्य प्रभाव पड़ता है? और यदि ऐसा है, तो दुनिया में कहां-कहां इस विषय पर शोध हुआ है? इन सवालों के जवाब के लिए केवल धार्मिक मान्यताओं का सहारा पर्याप्त नहीं होगा। हमें चिकित्सा संबंधी शोधपत्रों, नियंत्रित परीक्षणों, मस्तिष्क की गतिविधियों के अध्ययन और वैज्ञानिक समीक्षाओं को देखना होगा।
इस पड़ताल में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आती है। मंत्र-आधारित ध्यान से चिंता और तनाव में कमी के कुछ प्रमाण मौजूद हैं। ‘ॐ’ के उच्चारण के दौरान मस्तिष्क की गतिविधियों में बदलाव भी दर्ज किया गया है। उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों पर एक छोटा नियंत्रित परीक्षण सकारात्मक संकेत देता है।
बेंगलुरु में मस्तिष्क की जांच: ‘ॐ’ बोलने पर क्या दर्ज हुआ?
इस विषय पर भारत के महत्त्वपूर्ण अध्ययनों में से एक वर्ष 2011 में प्रकाशित हुआ। इसका संबंध बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान से था। शोधकर्ताओं ने 12 स्वस्थ स्वयंसेवकों के मस्तिष्क का अध्ययन कार्यात्मक चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंबन यानी एफएमआरआई तकनीक से किया। प्रतिभागियों से ‘ॐ’ का उच्चारण कराया गया और उसकी तुलना सामान्य विश्राम तथा ‘स्स्स’ जैसी ध्वनि निकालने की स्थिति से की गई।
अध्ययन में ‘ॐ’ के उच्चारण के दौरान मस्तिष्क के कुछ क्षेत्रों में गतिविधि कम होने के संकेत मिले। इनमें अमिग्डाला, हिप्पोकैम्पस और अग्र सिंगुलेट कॉर्टेक्स जैसे क्षेत्र शामिल थे, जो भावनात्मक प्रक्रियाओं और मस्तिष्क के अन्य कार्यों से जुड़े हैं। यह निष्कर्ष शोधकर्ताओं के लिए इसलिए महत्त्वपूर्ण था, क्योंकि इससे संकेत मिला कि ‘ॐ’ का उच्चारण केवल एक धार्मिक ध्वनि नहीं, बल्कि मस्तिष्क की गतिविधियों से जुड़ी ऐसी प्रक्रिया भी हो सकता है जिसे प्रयोगशाला में मापा जा सके।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों पर शोध
वर्ष 2023 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली से जुड़े शोधकर्ताओं ने ‘ॐ’ का उच्चारण करने और उसका श्रवण करने के दौरान मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में 20 स्वस्थ वयस्क पुरुष शामिल थे। उनकी मस्तिष्क गतिविधियों को उच्च घनत्व वाली विद्युत मस्तिष्क लेखन तकनीक से दर्ज किया गया। प्रतिभागियों ने लगभग 5 मिनट तक ‘ॐ’ का उच्चारण किया और अलग सत्र में उसी मंत्र को सुना।
शोधकर्ताओं को उच्चारण और श्रवण, दोनों स्थितियों के बाद मस्तिष्क के कुछ नेटवर्कों से संबंधित गतिविधियों में बदलाव मिले। उन्होंने अनुमान व्यक्त किया कि ऐसे बदलाव विश्राम की अवस्था और ध्यान से जुड़ी प्रक्रियाओं से संबंधित हो सकते हैं।
स्पेन में मंत्र-आधारित ध्यान की व्यवस्थित समीक्षा
वर्ष 2022 में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के एक समूह ने मंत्र-आधारित ध्यान पर व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण प्रकाशित किया। इसमें स्पेन के कैनरी द्वीप स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान और स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी मूल्यांकन से जुड़े शोधकर्ता शामिल थे। शोधकर्ताओं ने उपलब्ध साहित्य से यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षणों का विश्लेषण किया। मंत्र की पुनरावृत्ति पर आधारित ध्यान-पद्धतियों में ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन और दूसरी मंत्र-आधारित विधियां शामिल थीं।
समीक्षा में नियंत्रण समूहों की तुलना में चिंता, अवसाद और तनाव के लक्षणों में औसतन छोटी से मध्यम स्तर तक कमी के संकेत मिले। प्रभाव के अनुमान में चिंता के लिए लगभग 0.46, अवसाद के लिए 0.33 और तनाव के लिए 0.45 का मान दर्ज किया गया। ये सांख्यिकीय प्रभाव-आकार हैं; इनका अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति के लक्षण उसी अनुपात में कम होंगे।
उच्च रक्तचाप के रोगियों पर ‘ॐ’ सुनने का परीक्षण
दिसंबर 2025 में ऑनलाइन प्रकाशित एक नियंत्रित परीक्षण ने इस विषय को शारीरिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में आगे बढ़ाया। इसमें प्रथम चरण के उच्च रक्तचाप से पीड़ित 60 लोगों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह ने एक महीने तक प्रतिदिन 528 हर्ट्ज़ पर तैयार ‘ॐ’ के उच्चारण की रिकॉर्डिंग सुनी, जबकि दूसरे समूह को सामान्य चिकित्सा देखभाल मिली।
शोधपत्र में हस्तक्षेप वाले समूह में नाड़ी, सिस्टोलिक और डायस्टोलिक रक्तचाप तथा हृदय गति परिवर्तनशीलता से जुड़े कुछ मापों में सकारात्मक बदलाव दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं ने मानसिक कल्याण, अनुभव किए गए तनाव और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार की सूचना दी। यह एक उल्लेखनीय परिणाम है, लेकिन इसे अंतिम प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी।
दुनिया में कहां-कहां इस विषय पर शोध हुआ है?
भारतीय मंत्रों और उनसे संबंधित ध्यान-पद्धतियों पर शोध किसी एक देश तक सीमित नहीं है। उपलब्ध प्रकाशित साहित्य में कई देशों और संस्थानों का योगदान दिखाई देता है।
- भारत — बेंगलुरु: राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान में ‘ॐ’ के उच्चारण और मस्तिष्क की गतिविधियों पर एफएमआरआई अध्ययन प्रकाशित हुआ।
- भारत — नई दिल्ली और कल्याणी: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान से जुड़े शोधकर्ताओं ने ‘ॐ’ के उच्चारण और श्रवण के दौरान मस्तिष्क की विद्युत गतिविधियों का अध्ययन किया। यह शोध 2023 में प्रकाशित हुआ।
- भारत — गुजरात, पुडुचेरी और केरल: चिकित्सा संस्थानों तथा अनुसंधानकर्ताओं ने मंत्र-आधारित ध्यान, उच्च रक्तचाप, तनाव और नींद से जुड़े परिणामों पर अध्ययन किए हैं। गुजरात और पुडुचेरी से जुड़े शोधकर्ताओं ने 2025 में प्रकाशित ‘ॐ’ श्रवण के नियंत्रित परीक्षण में भाग लिया; केरल से जुड़े शोधकर्ताओं ने ‘ॐ’ उच्चारण और योग निद्रा के संयुक्त अभ्यास का परीक्षण किया।
- स्पेन: कैनरी द्वीप स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान तथा स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी मूल्यांकन से जुड़े शोधकर्ताओं ने मंत्र-आधारित ध्यान पर व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण प्रकाशित किया।
- संयुक्त राज्य अमेरिका: राष्ट्रीय पूरक एवं एकीकृत स्वास्थ्य केंद्र ध्यान और मन-शरीर संबंधी अभ्यासों के स्वास्थ्य प्रभावों पर वैज्ञानिक साक्ष्यों की समीक्षा करता है। अमेरिकी चिकित्सा संस्थानों में ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन जैसे मंत्र-आधारित अभ्यासों पर नियंत्रित परीक्षण भी प्रकाशित हुए हैं। वर्ष 2022 में जामा नेटवर्क ओपन में स्वास्थ्यकर्मियों के तनाव पर ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन का एक यादृच्छिक नैदानिक परीक्षण प्रकाशित हुआ।
इन उदाहरणों से यह प्रमाणित होता है कि मंत्र-आधारित ध्यान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध हो रहा है और कुछ परिणाम प्रकाशित भी हो चुके हैं। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक साहित्य के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि दुनिया के सभी प्रमुख संस्थानों में विशेष रूप से दुर्गा पूजा या उसके प्रत्येक मंत्र पर सक्रिय शोध चल रहा है। किसी परियोजना के अभी जारी होने की पुष्टि के लिए उसके संस्थान, शोध-पंजीकरण और अद्यतन स्थिति की अलग जांच आवश्यक है।
क्या नवार्ण मंत्र और हवन स्वास्थ्य लाभ देता हैं?
‘ॐ’ के उच्चारण पर कुछ प्रयोग हुए हैं। मंत्र-आधारित ध्यान पर व्यवस्थित समीक्षा उपलब्ध है। ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य पर अमेरिकी राष्ट्रीय पूरक एवं एकीकृत स्वास्थ्य केंद्र भी वैज्ञानिक साक्ष्यों की समीक्षा करता है। लेकिन इन निष्कर्षों को दुर्गा पूजा के हर विधान पर लागू नहीं किया जा सकता। दुर्गा सप्तशती के पाठ, नवार्ण मंत्र के जप, हवन, आरती, शंखध्वनि, उपवास और पूरे नवरात्र के अनुष्ठानों का स्वास्थ्य पर प्रभाव जांचने के लिए अलग-अलग नियंत्रित अध्ययन चाहिए। ऐसे अध्ययनों में प्रतिभागियों की संख्या, अभ्यास की अवधि, तुलना समूह, पहले से मौजूद बीमारियां, दवाओं का इस्तेमाल और दीर्घकालिक परिणाम स्पष्ट होने चाहिए।
उदाहरण के लिए, यदि शोधकर्ता यह जानना चाहें कि दुर्गा सप्तशती के पाठ का तनाव पर क्या प्रभाव पड़ता है, तो उन्हें केवल पाठ करने वाले लोगों से अनुभव पूछना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें उपयुक्त तुलना समूह, तनाव के मान्य माप, नींद के आंकड़े और जरूरत पड़ने पर शारीरिक संकेतकों का अध्ययन भी करना होगा।
इसी तरह हवन के धुएं को स्वास्थ्यवर्धक बताने के लिए केवल धार्मिक मान्यता पर्याप्त नहीं होगा। धुएं में मौजूद कणों, गैसों, मात्रा, वायु-संचार और सांस संबंधी जोखिमों का स्वतंत्र परीक्षण आवश्यक है। किसी सामग्री का प्राकृतिक होना इस बात की गारंटी नहीं कि उसका धुआं फेफड़ों के लिए सुरक्षित है। इसलिए अभी उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर दुर्गा पूजा के सभी अनुष्ठानों को वैज्ञानिक उपचार घोषित करना उचित नहीं होगा।
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