छठ पूजा 2025 (Chhath Puja 2025) भारत का एक प्राचीन और अत्यंत पवित्र पर्व है जो सूर्य देव और छठी मईया को समर्पित होता है
Dot
यह त्योहार न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और पारिवारिक मूल्यों के सम्मान का भी प्रतीक माना जाता है।
छठ पूजा दीपावली के छह दिन बाद कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है।
छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला एक कठोर व्रत है। यह नवरात्रि (Navratri) के बाद हिंदू धर्म का सबसे लंबा और अनुशासित त्योहार माना जाता है।
पहले दिन को नहाय खाय कहा जाता है। इस दिन व्रती सूर्योदय से पहले स्नान करते हैं, आमतौर पर गंगा या किसी पवित्र नदी में
दूसरे दिन को खरना कहा जाता है। इस दिन व्रती सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्जला व्रत (nirjala vrat) रखते हैं यानी वे जल तक ग्रहण नहीं करते।
यह दिन छठ पूजा का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखकर प्रसाद तैयार करते हैं।
शाम को सूर्यास्त के समय सभी श्रद्धालु नदियों, तालाबों या सरोवरों के किनारे एकत्र होते हैं। व्रती बांस की सूप में प्रसाद रखकर संध्या अर्घ्य देते हैं।
पर्व का समापन उषा अर्घ्य से होता है। व्रती प्रातःकाल पुनः नदी या तालाब में जाकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
छठ पूजा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मूर्ति पूजा नहीं होती, बल्कि सूर्य और प्रकृति की सीधी उपासना की जाती है।
बिहार और पूर्वी भारत के लोगों के लिए छठ पूजा सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान (Cultural Identity) का प्रतीक है
Read Full News Story
Learn more